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20160711

डियर डैड


 हिंदी सिनेमा की ऐसी कई हस्तियां हैं, जिन्होंने अपने पिता से विरासत में कई गुण लिये हैं और वे मानते हैं कि अगर उनके पिता न होते तो वे अपनी जिंदगी में इन चीजों को कभी दुरुस्त नहीं कर पाते. ऐसा कई बार हुआ, जो पिता के किसी शब्द और किसी नसीहत या उस लम्हे की वजह से उनके लिये वे सबक बन गये.फादर्स डे के बहाने अनुप्रिया अनंत के साथ कुछ ऐसी ही यादों को सांझा कर रहे हैं स्टार्स

पापा ने कहा था फेल हुआ तो अच्छा हुआ : अनुपम खेर
मुझे अच्छी तरह याद है, जब मैं दसवीं में फेल हुआ था तो मेरे पिताजी मुझे लेकर रेस्टोरेंट गये थे. मैंने पूछा पिताजी हम यहां क्यों आये हैं तो उन्होंने कि हम यहां सेलिब्रेशन के लिए आये हैं. और मैं आश्चर्य में पड़ गया था कि भला कोई असफलता का भी जश्न मनाता है. लेकिन पिताजी ने उस दिन मुझे कहा था कि असफलता का सेलिब्रेशन मनाना सीखोगे,तभी जिंदगी में नया नजरिया दे पाओगे और असफलता से भी घबराओगे नहीं. उसका डट कर सामना करोगे, जैसे कि वह भी जिंदगी का हिस्सा ही हो. और वाकई फिर मैं कभी नहीं घबराया.


 पिताजी ने कहा जाओ और काम करो : अमिताभ बच्चन
उस दिन मैं घर की बालकनी में खड़ा बहुत परेशान था. वह दौर कठिन था. फिल्में नहीं थीं मेरे पास. मैं अभिनय छोड़ कर अन्य कामों में लीन था. पिताजी आये. पूछा क्या हुआ है तुम्हें. कहा पता नहीं, समझ नहीं आ रहा कि कहां चूक हो रही. लेकिन असफल हो रहा हूं. पिताजी ने कहा कि तुम जो सबसे अच्छा कर सकते हो. उस पर ध्यान नहीं दे रहे. तुम अभिनेता हो. कलाकार हो. काम करो. और कुछ मत सोचो. फिर मैंने कहा लेकिन अभी कोई काम नहीं है पास में. उन्होंने कहा कि संकोच मत करो, सामने से काम मांगो. लोग देंगे. क्योंकि तुम खुद को साबित कर चुके हो. मैंने उसी पल यश चोपड़ा को फोन लगाया कहा कि फीस नहीं काम चाहिए. और यूं मैं फिर से उस काम से जुड़ गया, जहां मैं खुद का सर्वश्रेष्ठ दे सकता था. 
 पापा ने कहा, खुद से पहचान बनाओगे तो लंबे टिकोगे : शाहिद कपूर
कुछ दिनों पहले किसी अखबार में पढ़ रहा था पापा का इंटरव्यू. पापा ने उसमें कहा कि मैंने कभी शाहिद के करियर में उसकी मदद नहीं की. मैंने किसी प्रोडयूसर को फोन नहीं किया. और इस बात से खुशी है कि शाहिद ने धीरे-धीरे अपनी पहचान बनायी. मैंने जब यह पढ़ा तो मेरी आंखों में आंसू थे. चूंकि यह बात सच है कि मैंने कभी पापा का नाम इस्तेमाल नहीं किया. पापा ने हमेशा यही राय दी थी कि खुद से पहचान बनाओगे तो लंबी पारी खेलोगे. वरना, वैसाखी की बने रहोगे. मैंने शुरुआत बैक डांसर से की थी. फिर एक वीडियो एल्बम में काम करने का मौका मिला.फिर वहां से हैदर के लिए फिल्मफेयर मिला तो यह एहसास हुआ कि पापा सही कहते थे. उनकी यही सीख मेरी जिंदगी की अहम सीख बन गयी.
ँपापा ने ही बढ़ाया हौसला : विद्या बालन
वह दौर था, जब मैंने तय किया कि मैं एक्ट्रेस बनूंगी और मैंने फिल्म भी साइन कर दी. लेकिन वह फिल्म डिब्बा बंद हुई और उसके बाद मैंने जितनी भी फिल्में साइन की. सारी फिल्में डिब्बा बंद हो गयी. उस दौर में मैं बहुत निराश हुई थी और पूरी तरह से डिप्रेशन में चली गयी थी. मैंने मान लिया था कि यह क्षेत्र मेरे लिए नहीं है. उस हताशा में मेरा साथ मेरे पापा ने सबसे ज्यादा दिया था. उन्हें विश्वास था कि मेरी टैलेंट को रोशनी जरूरी मिलेगी. उन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया और जब मैं सफल हुई तो उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें इस बात का डर बहुत सताता था कि कहीं निराशा में मैं कोई गलत कदम न उठा लूं. इसलिए वे हरदम मेरे साथ रहते थे और यही वजह है कि आज भी मैं असफलता से कभी नहीं घबराती. मेरी पापा से आज भी घंटों बातचीत होती है. 
लेकिन वे मेरे लिए तो बेस्ट पापा हैं : श्रद्धा कपूर
मैं जब स्कूल में पढ़ती थी. वह दौर मेरे पापा का था. उस वक्त उनकी काफी फिल्में रिलीज होती थीं और वे नेगेटिव किरदार निभाते थे. स्कूल में मुझे सभी बहुत चिढ़ाते थे इन बातों से कि मेरे पिताजी नेगेटिव किरदार निभाते हैं और वह विलेन हैं. लेकिन मेरे पापा की यह खासियत थी कि मैं जब भी घर आती तो वह मुझे हमेशा प्यार से समझा देते थे. आज मेरी कामयाबी को देख कर वह कहते हैं कि मैंने उनकी भी जिंदगी जी ली है और वे हमेशा कहते हैं कि सफलता को सिर पर मत चढ़ाना. जल्दी ही उतर जाता है. चूंकि उन्होंने सफलता और असफलता का वह दौर देखा है.मैंने अपने पापा को जब अपनी कमाई से कार गिफ्ट की थी तो वे बेहद खुश हुए थे और मैं उनके लिए कोई भी तोहफा ले जाऊं. तो वह बहुत खुश होते हैं. 

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