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20140426

बली की बकरी



कंगना रनौट ने अपनी पिछली फिल्म क्वीन से साबित कर दिया है कि वे चौंकानेवाली अभिनेत्रियों में से एक हैं. रिवॉल्वर रानी में जो उनका अवतार है. वह हिंदी सिनेमा की आम अभिनेत्री तो नहीं दिखतीं. कंगना अपने किरदारों के साथ किस तरह प्रयोग कर रही हैं. उसकी साफ तसवीर फिल्म रिवॉल्वर रानी में उनके बर्ताव को देख कर स्पष्ट होती है. हां, यह सही है कि फिल्म की कहानी थोड़ी ऊबाऊ है. लेकिन कंगना के अभिनय पर कोई भी उंगली नहीं उठाई जा सकती. वे जिस तरह परदे पर नजर आयी हैं. वर्तमान में कोई अभिनेत्री ऐसे किरदार निभाने की हिम्मत या जुरर्रत करती नजर नहीं आती हैं, यह कंगना का प्रयोग ही है, जो उनसे इस तरह के कई बेहतरीन प्रयोग करा रहा है. कंगना इस फिल्म से साबित करती हैं कि आप उनको लेकर कोई विचार हरगिज न रखें. और न ही उनकी छवि बनायें. वे मिडिल क्लास परिवार की एक तरफ रानी बनती हैं तो दूसरी तरफ चंबल की अलका सिंह बन कर लोगों को हरकाने की भी जुरर्रत रखती हैं. वह एक मां का दिल भी रखती है तो धोखा देनेवाले लोगों से नफरत भी करती है. वह सनकी है. लेकिन अंदर से कोमल है. फिल्म के नायक उन्हें प्यार से कोकोआ बुलाते हैं, क्योंकि वह नारियल की तरह अंदर से सख्त और अंदर से नर्म है. फिल्म में कंगना ने अपने पोशाकों के चुनाव से लेकर जिस अंदाज में चंबल की भाषा पर अपनी कमांड दिखाई है. वह साबित करता है कि कंगना संपूर्ण अभिनेत्री बनने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं.
रिवॉल्वर रानी एक ऐसी लड़की की कहानी है, जिसने बचपन में अपनी मां के साथ हुए अत्याचार की वजह से हाथों में बंदूक उठायी. फिल्म के एक दृश्य में एक औरत अपनी बेटी को आशीर्वाद लेने के लिए अपनी बेटी को लेकर अलका सिंह यानी रिवॉल्वर रानी के पास लेकर आती है. अलका सिंह उसकी मां से कहती है कि वक्त आने पर हाथ में बंदूक धरा देना. अपने क्षेत्र में शान से जियेगी...अलका के ये संवाद बताते हैं कि वह जिस समुदाय और समाज का हिस्सा है. वहां महिलाएं तभी सुरक्षित हैं और शान से जी सकती हैं. जब तक वह खुद मजबूत न हों. अलका सिंह अपने मामाजी के ईशारों पर चलती है. वह पूरी दुनिया से लड़ लेती है. लेकिन घर में ही वह बकरी बन जाती हैं. बली यानी मामाजी के हाथों वह बकरी बन जाती हैं. यानी बली की बकरी. हर साम्राज्य में एक सकूनी मामा होते ही हैं. इस फिल्म में भी बली वह सकूनी मामा हैं जो अपनी भांजी अलका सिंह का नाम इस्तेमाल करे. उसे कठपुतली की तरह इस्तेमाल कर खुद उस साम्राज्य पर राज करना चाहते हैं. और अंतत: घर का भेदी लंका ढाये ही होता है. वही दूसरी तरफ अलका सिंह जो गोलियों से ढाय ढाय करने में जरा भी देर नहीं लगाती. उसके अंदर इस बात का आक्रोश है कि लोग उसे बांझ करते हैं. लेकिन अचानक उसे पता चलता है कि वह मां बननेवाली है. वह कहती है कि शोर मत मचाओ. बेबी को स्ट्रेच हो रहा है. मसलन उस सनकी के दिल में भी मां का प्यार है. ममता है. वह प्यार में पागल है. प्यार की भूखी है. और इसी अंधकार में वह एक मतलबी इंसान को अपना सबकूछ समझ बैठती है. यहां भी चुनावी माहौल है और कुर्सी की लड़ाई है. इस कुर्सी की लड़ाई में मीडिया, विचौलिये, नेता, और चुनावी दांव पेंच की कहानी को बखूबी दर्शाया गया है. लेकिन फिल्म की कुछ कमजोर कड़ियां हैं. जैसे चंबल में ही जाकर फिल्म की शूटिंग यानी वास्तविक लोकेशन में फिल्म की शूटिंग की क्या अनिवार्यता थी. फिल्म में वास्तविक लोकेशन का चुनाव सार्थक नजर नहीं आता. फिल्म में एक और नजरिये को बेहतरीन तरीके से दर्शाया गया है  कि महिलाएं भले ही हाथों में बंदूक थाम ले.लेकिन फिर भी उसकी कमान कहीं न कहीं किसी पुरुष के हाथों में ही होती है. मतलब महिलाएं किसी न किसी रूप में हैं कमजोर ही. साथ ही फिल्म में अंत में सीक्वल बनने के आसार नजर आ रहे हैं. रिवॉल्वर रानी जितनी मजबूत दबंग महिला के रूप में उन्हें दर्शाया. अन्ंत में भी उसकी वह दबंगई जारी रखनी चाहिए थी. बहरहाल महिलाओं को केंद्र में रख कर एक अच्छी कोशिश है यह फिल्म. 

रिवाल्वर मुमताज़ के चमचम शाहजहां

कंगना हिंदी सिनेमा की पहली अभीनेत्री होँगी जिन्होंने कोई ऐसा क़िरदार निभाने के लिए हामी भरी होगी। फिल्म रिवाल्वर रानी में जिस तरह उन्होने अपना रूप धारण किया है और जिस तरह उच्चारण और डायलेक्ट के साथ बीहड़ की बोलीं में खुद को रंगा है।  हिंदी सिनेमा में ऐसा अवतार कम से कम अभिनेत्री क देख्ने को नहि मिलता। आप फिल्म अशोक देखें। उस फिल्म में करीना ने एक ऐतिहासिक किरदार निभाया है।  लेकिन उनके अवतार और लुक में वह ग्लैमर नजर आयी हैँ।  यह उनकी खुद की चाहत थी या फ़िर निर्देशक की यह तो वे हि बता सकते।  हाँ मगर, कंगना ने वास्तविकता में बॉलीवुड में अभी दबंगई दिखा दिया है।  उन्होंने साबित कर दिया है कि बोल्ड होने का मतलब केवल पर्दे पर शराब पीकर बातें बनाना नहीँ है।  असल में दबंगई ये है।  रिवॉल्वर रानी में जब वह  सनकती है तो सबको गोलियों से धुन देती है।  लेकिन फिर भी उसे उनलोगों की [परवाह होती है जिन्होंने उन्हे प्यार दिया है।  जब उसे प्यार करने वाला , दीदी-दीदी कहने वाले लड़के की भि पीटाई होती है तो वो बौखला उठती है।  वह एक डाकू है।  लेकिन वह खूंखार नहीं है।  उसके दिल में यही तम्मना है कि उसे कोइ सच्चा प्यार करने वाला मिले।  वह शादी करना चाहती है अपने पति के लिये खाना बनाना चाहती है।  अपने बच्चे को अच्छी परवरिश देना चाहती है।  वह हरगिज नहीं  चाहती कि उसके साथ जो हुए वह बच्चे के साथ भी हो।  हर रिवाल्वर रानी एक प्रेम कहानी है।  एक ऐसी प्रेम कहानी जिसमे मुमताज़ अपने शाहजहां  के लिये ताज महल बनवाना चाहती है।  वह रोहन उर्फ़ चमचम को दुनिया की हर ख़ुशी देना चाहती है , वह उसकी खुशी के लिये चम्बल में फ़िल्म सिटी बना डालतीं है।   आमतौर पर कोइ दीवाना अपनी माशूका के लिये ये सब करता है. लेकिन रिवाल्वर रानी के सिर्फ़  हाथोँ में  ही बंदूक रखती है।  लेकिन उसके दिल में तो प्यार ही प्यार है।  रिवाल्वर रानी अपने शाहजहाँ का नाम प्यार से चमचम रखती है।  वाकई में फिल्म का नायक चमचम की  तरह हीं अन्त में बर्ताव भी करता है।  चमचम की तरह उसका प्यार भी बस दिखावे वाला ही होता है।  फिल्म में कई हकीकत को बयां करने  की कोशिश की गई है जिसे नकारा नहीं जा सकता।  इस लिहाज से महिलाओं के लिये महत्वपूर्ण फ़िल्म है

20140425

ँपाठकों से,
मैं और मेरे सुपरस्टार्स-18
इस बार  रोहित कुमार रणवीर सिंह से पूछ रहे हैं उनके पसंदीदा सवाल
रोहित कुमार : आपने इतनी बड़ी बड़ी मूंछें और दाढ़ी इन दिनों क्यों रखी है?
रणवीर सिंह : जैसा कि आप मेरी फिल्म रामलीला में देख रहे होंगे. मैंने फिल्म में जैसा किरदार निभाया है. उसकी यह मांग थी. इसके अलावा अभी मेरी अगली फिल्म गुंडे आ रही है. उसमें भी मेरे किरदार की यह डिमांड है. मेरे लुक की डिमांड है.
रोहित कुमार : आपको इंडस्ट्री में आने के लिए कितने पापड़ बेलने पड़े?
रणवीर सिंह : अरे बहुत सारे पापड़ बेलने पड़े. मैं तो बिल्कुल भी फिल्म इंडस्ट्री से किसी को नहीं जानता था. मैंने फिल्म मेकिंग की पढ़ाई कर रखी थी. अच्छा लिख लेता था. लेकिन फिल्मों में काम करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी. सब पागल समझते थे मुझे. क्योंकि जो वे फिल्में आॅफर करते थे. मैं छोड़ देता था. तो कहते कि कौन लेगा तुम्हें हीरो. लेकिन मैं लकी रहा कि  मुझे यशराज बैनर ने लांच किया.
रोहित : आपके लाइफ में कोई सपनों की रानी आयी है कि नहीं
बिल्कुल  आयी है और उसका ही इंतजार है. मैं तो टूट कर प्यार करनेवालों में से हूं. मेरी सपनों की रानी जैसी है वैसी ही मेरी जीवन साथी भी बनेगी. अभी फिलहाल सिंगल हूं. लेकिन कॉलेज स्कूल में खूब मस्ती  करता था और उस वक्त सपनों की रानी आती जाती रहती थी.
एक्सट्रा शॉट
रणवीर सिंह अभी हाल में ही ढेंगू की बीमारी से ग्रसित हो गये थे.
रणवीर सिंह पहले न्यूकमर हैं, जिनसे यशराज ने न्यूकमर को लांच करने की परंपरा शुरू की.
रणवीर सिंह जल्द ही जोया अख्तर की फिल्म में मुख्य किरदार निभाने जा रहे हैं.

ौं और मेरे स्टार्स -17


इस बार अदिति सिन्हा अपने पसंदीदा सुपरस्टार ऋतिक रोशन से सवाल पूछ रही हैं
ऋतिक रोशन से अदिति सिन्हा का सवाल
अदिति हजारीबाग की रहनेवाली हैं.
अदिति : आपको सबसे पहले यह एहसास कब हुआ कि आप सेलिब्रिटी बन चुके हैं और आपकी फिल्म कहो न प्यार है. सबको बेहद पसंद आ रही है
ऋतिक  : मैं फिल्म कहो न प्यार की रिलीज के बाद इंटरवल में मुंबई के कई थियेटर में जाता था. ताकि लोगों के रियेक् शन देख पाऊं. मैं देख रहा था कि लोग किस तरह रोहित के किरदार से प्यार करने लगे हैं और किस तरह से लोग मेरे गाने के साथ थिरक रहे हैं. मुझे बेहद अच्छा लग रहा था. फिल्म देखने के बाद सभी मेरे पास जिस तरह से आकर लिपट रहे थे. मैं पागल हो गया था. वह दिन मैं कभी नहीं भूल सकता.
अदिति : आप सुजैन को प्यार से क्या कह कर बुलाना पसंद करते हैं.
ऋतिक : मैं उन्हें एंजेल कह कर बुलाता हूं. क्योंकि  मुझे याद है. मैं जब उनसे काफी दिनों के बाद एक डिस्को थेक में मिला था. शादी से पहले. मैंने पूरे डिस्को थेक में आसानी से पहचान लिया था कि यही सुजैन हैं. चूंकि सुजैन बेहद खूबसूरत और बिल्कुल परी की तरह नजर आ रही थीं. सो, मैं उसे तब से लेकर अब तक एंजेल ही बुलाता हूं.
बॉक्स में :
 ऋतिक रोशन और उनकी पत् नी को मिलवाने में अभिनेता कुणाल कपूर और उदय चोपड़ा की मुख्य भूमिका रही. वे दोनों के बीच इमिडियेटर की भूमिका निभाते थे.
कहो न प्यार है में ऋतिक रोशन के साथ करीना कपूर की जोड़ी बननेवाली थी. लेकिन करीना ने इनकार के बाद यह फिल्म अमीषा पटेल को मिली
ऋतिक रोशन की जल्द ही रिलीज होेनेवाली फिल्म कृष 3 में उन्होंने खासतौर से फिटनेस की ट्रेनिंग ली है और वे जिस फ्लोरमेट पर एक्सरसाइज करते हैं. वह कई लाखों का फ्लोरमेट है, जिसे खासतौर से ऋतिक की सेहत को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है.




filmi baatein

1. रानी मुखर्जी से पहले फिल्म ब्लैक करीना कपूर को आॅफर हुई थी. लेकिन करीना ने मना कर दिया था. बाद में यह फिल्म रानी को मिली.
2. बिपाशा अपने करियर की शुरुआत अभिषेक बच्चन के साथ आखिरी मुगल  से करनेवाले थी.लेकिन फिल्म के प्रोमो शूट के बाद ही फिल्म डिब्बाबंद हो गयी.
3.अक्षय कुमार को घर पर पापा से खूब पड़ती थी थप्पड़. चंूकि वह घर पर बड़े थे. गलती कोई भी करे. थप्पड़ अक्षय कुमार को ही लगती थी.
4. शाहरुख खान स्कूल में जिस बेंच पर बैठते थे. वहां उन्होंने 420 लिख रखा था.चूंकि वह बचपन में बेहद शरारती थे.
5. धर्मेंद्र को फिल्मों में काम करने के लिए सबसे पहली जो तनख्वाह मिली थी वह केवल 51 रुपये थे. 

मैं और मेरे स्टार्स -16


इस बार नवीन अपने पसंदीदा  स्टार शाहरुख खान से  सवाल पूछ रहे हैं.
नवीन कोलकाता के रहनेवाले हैं.
नवीन : आपने कभी ऐसा सपना देखा था कि आप इतने बड़े सुपरस्टार बनेंगे?
शाहरुख : नहीं, मुझे नहीं मेरी अम्मी को लगा था. मेरी अम्मी को मैं दिलीप कुमार जैसा लगता था शुरू से. हां, यह जरूर था कि मुझे शुरू से कुछ अलग करने की इच्छा थी और मैं चाहता था कि मैं अपनी जिंदगी में कुछ अलग करूं. मुझे याद है. मां अस्पताल में थीं. वहां मेरे स्कूल के एक प्रिंसिपल उनसे मिलने गये तो उन्होंने कहा कि आपको लगता है कि शाहरुख एक्टर बन पायेगा. मां ने कहा कि अगर शाहरुख ने कहा है तो वह बन कर दिखायेगा. मां को शुरू से मेरे विश्वास पर विश्वास था.
नवीन : आपकी जिंदगी की पहली कमाई क्या थी?
शाहरुख : मेरी जिंदगी की पहली कमाई 51 रुपये थी. जो मैंने एक इवेंट के वॉलेंटियर बन कर कमाया था और मेरे दोस्त और मैंने उसी में खूब खुशी से पार्टी शार्टी भी की थी.
ंनवीन : हमने सुना है कि आप अपनी गाड़ी में ब्लैक शीशा नहीं रखते?
शाहरुख : हां, एक तो यह इलिगल है. दूसरी बात है कि मुझे अच्छा लगता है कि जब मैं सड़क पर निकलूं अपनी कार से तो लोग मुझे देखें और वे लोग जिस स्माइल से मेरा स्वागत करते हैं. मैं अगर कम से कम हाथ ही हिला दूं तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता. इसलिए मैं ब्लैक शीशा नहीं रखता.
बॉक्स में :
 शाहरुख खान की गाड़ी का नंबर 555 है. इसकी खास वजह यह है कि उनके लिए 5 लक्की नंबर है.
शाहरुख खान केवल हर दिन 4 घंटे की नींद लेते हैं. बाकी दिन वे काम करते रहते हैं.
एक बार जब वह दिल्ली में थे और उनका शो फौजी आ रहा था. वह सड़क पर निकले तो एक बुढ़ी महिला ने बोला देखो वह अभिमन्यु जा रहा है. उस दिन पहली बार उन्हें लगा कि वह अब पहचाने जाने लगे हैं. 

ँमैं और मेरे स्टार-16


इस बार पाठकों ने सबसे ज्यादा सवाल अक्षय कुमार के लिए भेजे हैं. सभी पाठकों के सवाल करना मुमकिन नहीं. इसलिए तीन पाठकों के तीन सवाल हम प्रकाशित कर रहे हैं.
नवीन कोलकाता के रहनेवाले हैं. इस बार मुजफ्फरपुर से राम कुमार, पटना से आकाश सिंह और पटना से ही प्रियंका अपने फेवरिट स्टार अक्षय कुमार से सवाल पूछ रहे हैं.

प्रियंका  : आप अपनी जिंदगी में सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगे?
अक्षय : मैं अपनी सफलता का श्रेय पूरी तरह से माता पिता, मेरे परिवार को देना चाहूंगा. चूंकि उन्होंने हमेशा मुझे सपोर्ट किया है. मैं मानता हूं कि अगर आपका परिवार आपके साथ रहे तो आप बुरे काम करने से डरते हो. उनका प्यार आपको हमेशा अच्छा काम करने के लिए प्रेरित करता है. मैं अपनी मेहनत और लगन से आगे बढ़ा तो अपनी मेहनत को भी श्रेय देना चाहूंगा. साथ  ही आपलोगों का. मेरे फैन्स ने मुझे हमेशा प्रेरित किया है. आप सबका प्यार मिलता रहे तो मैं लगातार अच्छा काम करता रहंूगा.

राम कुमार : आप कभी हॉरर फिल्म बनाना पसंद करेंगे?
अक्षय : मुझे हर तरह की फिल्में पसंद हैं. हॉरर जॉनर के बारे में फिलहाल सोचा नहीं है. फिलहाल अपने प्रोडक् शन से अलग तरह की फिल्में बना रहा हूं. देखूंगा. हो सकता है. कोई अच्छी कहानी लेकर आये तो बनाऊं. मुझे हॉरर से ज्यादा थ्रीलर फिल्में ज्यादा पसंद आती हैं.

आकाश सिंह :  आप एक साल में कई फिल्में करते हैं. तो कैसे कर पाते हैं. और कोई एक्टर तो ऐसा नहीं करते?
अक्षय : दूसरों की बात मुझे नहीं पता. मुझे खाली बैठना पसंद नहीं. मैं स्क्रिप्ट को महत्व देता हूं. अभी कोई फिल्म कर रहा और उसी दौरान कोई निर्देशक आते हैं  अच्छी कहानी लेकर. तो फिर उन्हें इंतजार क्यों कराऊं. और फिर अच्छी फिल्मों से मैं भी तो जुड़ना चाहता हूं. इसलिए मेरे लिए फिल्मों के नंबर, साल नहीं स्क्रिप्ट और निर्देशक महत्व रखते हैं.
 एक्स्ट्रा शॉट
अक्षय कुमार जब पहली बार मुंबई आये थे तो उन्होंने एक कोचिंग इंस्टीटयूट ज्वाइन किया था.
अक्षय कुमार को शाम की पार्टियों में जाना बिल्कुल पसंद नहीं है. वह बहुत जल्दी सोना पसंद करते हैं.
अक्षय कुमार राजेश खन्ना की होम प्रोडक् शन में जय जय शिव शंकर में काम करना चाहते थे. उस वक्त वे राजेश खन्ना के दामाद नहीं थे. लेकिन उन्हें राजेश खन्ना ने चुना ही नहीं. बाद में अक्षय ही राजेश खन्ना की बेटी टिष्ट्वकंल से शादी करके उनके दामाद बने. 

मैं और मेरे सुपरस्टार्स-15


इस बार माधुरी दीक्षित के फैन किरण प्रकाश और पटना की सोनू कुमारी अपनी पसंदीदा अभिनेत्री माधुरी दीक्षित से
किरण प्रकाश
किरण : आपको पहली फिल्म अबोध में काम करने का मौका कैसे मिला?
माधुरी : गोविंद मुनीस उस वक्त मेरे पड़ोसी थे. वे जानते थे कि मुझे अभिनय और डांस में दिलचस्पी है. उन्होंने बताया कि राजश्री में आॅडिशन चल रहे हैं. मुझे जाना चाहिए. मैं गयी. मैंने आॅडिशन दिया और मुझे मेरी पहली फिल्म अबोध मिली.
किरण: क्या आपने एक्टिंग में कोई ट्रेनिंग ली है?
माधुरी :  नहीं कभी कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं ली. स्कूल कॉलेज में एक्स्ट्रा एक्टिविटिज का हिस्सा बनती थी. तो उसका फायदा हुआ. हां, डांस का शौक मुझे शुरू से रहा. पिताजी की वजह से मेरी दिलचस्पी इसमें और बढ़ गयी.
सोनू कुमारी : माधुरी जब आप फिल्मों से दूर थीं तो फिल्मों को मिस करती थी?
हां, बिल्कुल. फिल्म मेरी दुनिया है. मुझे काफी लगाव रहा है इससे. हां, मगर उस वक्त परिवार की देखभाल करना भी जरूरी था. सो किया. अब फिर से अपनी दुनिया में लौट आयी हूं.
बॉक्स में :
 माधुरी दीक्षित की शादी सुरेश वाडेकर से होनेवाली थी. लेकिन सुरेश वाडेकर ने माधुरी का रिश्ता सिर्फ यह कह कर ठुकरा दिया क्योंकि उस वक्त माधुरी बेहद दुबली पतली थीं

फिल्म कर्मा में माधुरी दीक्षित को आयटम नंबर करने का मौका मिला था. लेकिन एडिटिंग में यह गाना फिल्म से अलग हो  गया. लेकिन फिर भी सुभाष घई ने माधुरी की प्रतिभा का पहचान उसी वक्त कर लिया था. बाद में सुभाष घई के साथ माधुरी ने कई हिट फिल्में दी.इस फिल्म में श्रीदेवी जो कि माधुरी की प्रतिद्वंदी मानी जाती थी. फिल्म में मुख्य किरदार निभा रही थीं. 
हाल ही में मोरक्को के एक अभिनेता ने मुंबई में आयोजित एक फिल्मोत्सव में भाग लिया तो उन्होंने बताया कि बॉलीवुड की एक हस्ती कुछ दिनों पहले  जब मोरक्को पहुंची थी, तो वहां के लोगों की नजर केवल एक शख्सीयत पर जा टिकी थी. मोरक्को ने उस अभिनेता को टाइगर की उपाधि दी. उन्होंने कहा कि वह टाइगर की तरह शान से चलते हैं. ये शख्सीयत कोई और नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा के शंहशाह अमिताभ बच्चन थे. जी हां, यह हकीकत है कि अमिताभ बच्चन बॉलीवुड के असल टाइगर हैं. चूंकि  71 वें बसंत में प्रवेश करने क ेबावजूद वे जिस तन्मयता और जिस जिंदादिली से आज भी काम करने के लिए तत्पर रहते हैं. वह हर किसी के वश की बात नहीं. अमिताभ बच्चन ने एक लंबा सफर तय किया है. और हर शख्स की जिंदगी में उनके संघर्ष, उनकी कामयाबी में उनका शहर, उनके दोस्त, उनका परिवार साथ साथ चलता है. तो आखिर अमिताभ को अमिताभ हकीकत में किसने बनाया. अमिताभ की जिंदगी के ऐसे कुछ चुनिंदा लोगों, शहरों व पड़ावों पर

खास शहर
अमिताभ बच्चन का जन्म इलाहाबाद में हुआ. उन्होंने वहां अपना बचपन बिताया. अपने बाबूजी हरिवंशराय बच्चन की परवरिश में उन्होंने पूरी दुनिया देखी. अमिताभ आज खुद को साहित्यिक रूप से इतना समृद्ध इसलिए मानते हैं, क्योंकि अमिताभ की जिंदगी में उनके पिता हरिवंशराय बच्चन व माता तेजी बच्चन का अत्यधिक प्रभाव रहा. चूंकि बचपन से ही अमिताभ अपने बाबूजी के साथ कविता समारोह व कई साहित्यिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे. और यही वजह थी कि वे इलाहाबाद से आज भी जुड़े रहे हैं. अमिताभ वहां अपने बाबूजी के साथ साइकिल पर बैठ कर स्कूल जाया करते थे. अमिताभ की जिंदगी में इलाहाबाद के साथ साथ दिल्ली शहर की भी खास अहमियत रही. चूंकि दिल्ली शहर में उन्होंने किरोड़ीमल कॉलेज से अपने आगे की पढ़ाई पूरी की. किरोड़ीमल कॉलेज में ही उनका अभिनय की तरफ रुझान बढ़ा. कॉलेज में उन्होंने कई नाटकों में हिस्सा लिया. दिल्ली में उनका अपना पुस्तैनी मकान भी है, जिसका नाम सोपान है. आज भी अमिताभ दिल्ली जाते हैं तो अपने घर में वक्त बिताना पसंद करते हैं. अमिताभ की जिंदगी में कोलकाता भी अहम शहर रहा. जहां उन्होंने शॉ और वैलेंस नामक शिपिंग फर्म में काम करना शुरू किया था और उन्हें वहां 500 रुपये मिले थे. जो उनकी पहली सैलरी थी. उन्होंने कोलकाता में ही अपनी जिंदगी की पहली कार ली थी और वह कार सेकेंड हैंड फियेट कार थी. कोलकाता के बाद उन्होंने मुंबई की तरफ रुख किया. और आज मुंबई ही उनकी कर्मभूमि है. अमिताभ ने मुंबई में आकर एक लंबा संघर्ष का दौर देखा. धीरे धीरे हिंंदी फिल्म इंडस्ट्री को उनकी प्रतिभा का ज्ञान हुआ और मुंबई शहर ने ही उन्हें शंहशाह का ताज पहना दिया. आज मुंबई के जूहू इलाके में स्थित जलसा, प्रतिक्षा अमिताभ की सफलता का पर्याय है. आज जूहू इलाका अमिताभ के बंगले की वजह से सर्वाधिक लोकप्रिय स्थल बन चुका है.
खास लोग
अमिताभ को अमिताभ बच्चन बनाने का श्रेय कई लोगों को जाता है. अमिताभ इस लिहाज से काफी भाग्यशाली रहे, कि उन्हें हमेशा अच्छे दोस्तों का साथ मिला. अमिताभ के भाई अजिताभ बच्चन ही वह पहले शख्स थे, जिन्होंने अमिताभ की तसवीर ख्वाजा अहमद अब्बास तक पहुंचायी थी. अमिताभ ने जब अपनी फिल्मी करियर की शुरुआत की, तो उन्हें पहला मौका ख्वाजा अहमद अब्बास ने दिया. लेकिन फिल्म को असफलता मिली. इसकी वजह से उन्हें आगे फिल्में मिलनी बंद हो गयी. फिर उन्हें उस वक्त महमूद का साथ मिला. महमूद ने अपनी फिल्म बांबे टू गोवा में न सिर्फ उन्हें मौका दिया. बल्कि उन्हें मुंबई में हर तरह से मदद भी मुहैया करायी. दरअसल महमूद के भाई अनवर अली और अमिताभ काफी अच्छे दोस्त बन गये थे और अनवर के कहने पर ही उन्हें महमूद ने मौका दिया. एक दौर में अमिताभ शीर्ष सितारा बने. लेकिन फिर उन्हें लगातार नाकामयाबी मिलने लगी थी. उस वक्त उन्हें टीनू आनंद ने भी काफी सहारा दिया. अमिताभ को मिली कामयाबी का श्रेय उनकी पत् नी जया बच्चन को भी जाता है, जिन्होंने अमिताभ का साथ उस वक्त भी दिया. जब वह कामयाब नहीं थे. जया बच्चन के कहने पर ही अमिताभ को ऋषिकेश मुखर्जी की कई फिल्मों में काम करने का मौका मिला. बाद में उन्हें जंजीर जैसी फिल्म भी मिली, जो उनके लिए मिल का पत्थर साबित हुई. अमिताभ जब आर्थिक रूप से काफी बुरी स्थिति में थे. उस वक्त उनका साथ अमर सिंह ने निभाया. अमिताभ मानते हैं कि उन्हें उनके माता और पिता की वजह से कई गुण हासिल हुए. उन्होंने जिंदगी के नैतिक मूल्यों की सोच और आज उनकी जो भी सोच विकसित हो पायी वह माता और पिता की वैचारिक सोच की वजह से ही आयी. चूंकि मां तेजी बच्चन भी स्वतंत्रता सेनानी रहीं. अमिताभ में देशभक्ति की भावना जागृत हुई. सांस्कारिक रूप से खुद को समृद्ध बनाने का सारा श्रेय वे अपने माता पिता को ही देते हैं.
खास नाम
अमिताभ की फिल्मी सफर में  वास्तविक जिंदगी में भी नामों को लेकर काफी दिलचस्प बातें रहीं. अमिताभ का नाम पहले इनकलाब रखा गया था. चूंकि उस वक्त स्वतंत्रता आंदोलन चल रहा था. और मां तेजी बच्चन गर्भवती होने के बावजूद उसमें भागीदारी कर रही थीं तो उनके दोस्तों के सुझाव पर उनका नाम अमिताभ रख दिया गया था. लेकिन बाद में उनका नाम बदल कर अमिताभ रखा गया. फिल्मों में उनका विजय नाम से काफी सरोकार रहा. दीवार, जंजीर व अग्निपथ जैसी फिल्मों में वे विजय नाम से लोकप्रिय हो गये. बॉलीवुड में लोग उन्हें बिग बी, शंहशाह, सदी का महानायक के रूप में संबोधित करते हैं.
खास निर्देशक और फिल्म
ख्वाजा अहमद अब्बास ने अमिताभ को पहला मौका फिल्म सात हिंदुस्तानी से दिया. बाद में उन्हें असली पहचान प्रकाश मेहरा की फिल्म जंजीर, ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म अभिमान, चुपके चुपके, आनंद से मिली. यश चोपड़ा की फिल्म दीवार से अमिताभ की अलग पहचान स्थापित हुई. मनमोहन देसाई की फिल्म अमर अकबर एंथनी, कूली समेत कई फिल्मों ने उन्हें अलग पहचान दी. बाद में दौर में आर बाल्की की फिल्म पा ने उन्हें एक अदभुत किरदार में चरितार्थ किया.


 बॉक्स में :
अमिताभ बच्चन के पिता का सरनेम दरअसल श्रीवास्तव था. लेकिन हरिवंशराय बच्चन ने बच्चन सरनेम का इस्तेमाल दरअसल पेन नेम के रूप में किया था. बच्चन का मतलब होता है बच्चों की तरह और हरिवंशराय बच्चन को यह सरनेम काफी पसंद था. लेकिन बाद में उन्होंने अपने बच्चों को भी यही सरनेम दिया.
अमिताभ शुरुआती दौर में इंजीनियर बनना चाहते थे और एयरफोर्स ज्वाइन करना चाहते थे.
फिल्म सात हिंदुस्तानी में अमिताभ बच्चन ने जो किरदार निभाया है, वह किरदार फिल्म में रांची शहर का रहने वाला होता है.
अमिताभ ने सबसे पहले फिल्म से जुड़ाव मृणाल सेन की फिल्म भुवन शोम में वॉयस नैरेटर के रूप में  किया था.
सत्यजीत रे ने फिल्म शतरंज के खिलाड़ी में अमिताभ की आवाज का इस्तेमाल किया था.

अमिताभ ने लगातार 12 फ्लॉप फिल्में दी. बाद में जंजीर से उन्हें स्टारडम का स्वाद चखने का मौका मिला,

मैं और मेरे सुपरस्टार्स13


इस बार  अमित भदानी, रांची से श्री नंदिनी और बोकारो से निशि वर्मा, रांची से अनुषा   अपनी प्रिय अभिनेत्री दीपिका पादुकोण से कुछ सवाल पूछ रहे हैं.

अमित भदानी : आपके प्रिय दोस्त कौन कौन हैं?
दीपिका  : फिल्म ब्रेक के बाद के दौरान मैं शहाना गोस्वामी से मिली और वह मेरी सबसे प्रिय और खास दोस्त बन गयी है. इसके अलावा मेरी मॉम मेरी अच्छी दोस्त हैं. स्कूल के दोस्त आज भी दोस्त हैं.
श्री नंदिनी : आप हमेशा हर लुक में फ्रेश नजर आती हैं. क्या आप अपने लुक में अपना भी इनपुट्स देती हैं?
दीपिका  :  मुझे हमेशा से प्रेजेंटेबल रहना बेहद पसंद है. और मैं शुरू से ही इसमें दिलचस्पी लेती थी. स्पोर्ट्स की वजह से हमेशा फिट रही और मेरी मॉम मेरी फैशन डिजाइनर रही हैं. वे मुझे स्टाइल के बारे में बताती रहती हैं. तो मैं उनसे काफी कुछ सीखती रहती हूं.
निशि वर्मा : क्या आज भी आप अपने बचपन शहर को मिस करती हैं. क्या मुंबई में रह कर भी आप वहां से कनेक्टेड हैं?
हां, बिल्कुल. मैं हमेशा तो नहीं लेकिन अपने होमटाउन जाती रहती हूं. मैं मुंबई में अपने घर से इस रूप में कनेक्टेड रहती हूं कि मेरे कूक वही के हैं. वे बेहतरीन फिल्टर कॉफी और साउथ इंडियन खाना बनाते हैं और हमें खिलाते हैं. मेरे साथ दोस्तों को भी बेहद पसंद है वह खाना.
अनुषा : क्या आप आज भी सिंगल हैं?
दीपिका : हां, मैं जब किसी रिलेशन में थी. तो सबको बताती रहती थी और मैंने कभी कुछ भी नहीं छिपाया. वह रिश्ता खास रिश्ता था. आगे भी कभी प्यार हुआ और किसी के साथ जुड़ूंगी तो उसका ऐलान जरूर करूंगी

 दीपिका पादुकोण को इंडस्ट्री में लोग डिंपल गर्ल के नाम से जानते हैं.
दीपिका पादुकोण ने कभी हिमेश रेशमिया के वीडियो एल्बम में अभिनय किया था.
दीपिका पादुकोण को सबसे पहले सलमान खान लांच करने वाले थे. लेकिन दीपिका ने उस वक्त यह कह कर मना कर दिया था कि अभी वह बहुत छोटी हैं. बाद में उन्होंने शाहरुख खान के साथ शुरुआत की.
दीपिका पादुकोण में उनके पिता का नाम प्रकाश, बहन का नाम रोशनी और उनका अपना नाम दीपिका है. दरअसल, उनके परिवार में सभी के नाम प्रकाश करनेवाले नामों से मेल खाते नामों पर रखा गया है. 

मैं और मेरे सुपरस्टार्स-12



इस बार  वैशाली से रवि यादव और बिहारशरीफ से सफदर हुसैन अपने प्रिय अभिनेता सलमान खान से कुछ सवाल पूछ रहे हैं.

्नरवि यादव : आपको फिल्म बीवी हो तो ऐसी में काम करने का मौका कैसे मिला?
सलमान : मैं नहीं चाहता था कि मैं अपने पिता के नाम पर फिल्म हासिल करूं. मैं जब आॅडिशन के लिए जाता था तो कभी नहीं बताता था कि मैं सलीम खान का बेटा हूं, यहां तक कि सूरज बड़जात्या को भी फिल्म मैंने प्यार किया में मुझे साइन करने के बाद पता चला था कि मैं सलीम खान का बेटा हूं. बीवी हो तो ऐसी भी इसी क्रम में मिली.आॅडिशन के माध्यम से.
रवि : आपने पहले कभी फिल्मों से पहले भी एक्टिंग की थी?
नहीं, पहली बार फिल्म बीवी हो तो ऐसी से ही शुरुआत हुई.
सफदर : आपकी आनेवाली फिल्म कौन सी है?
सलमान  : मैं फिल्म किक के लिए अभी शूटिंग कर रहा हूं और भाई सोहेल खान की फिल्म आनेवाली है. उसका नाम फिलहाल कुछ भी फाइनल नहीं हुआ है. इसके साथ साथ सूरज बड़जात्या की फिल्म में काम कर रहा हूं.

बॉक्स में :
सलमान खान बिइंग ह्मुन नामक संस्थान के माध्यम से चैरिटी करते हैं. मुंबई के बांद्रा इलाके में बिइंग ह्मुन के स्टोर हैं. सलमान खान बचपन से ही अपने टीचर्स के पसंदीदा स्टूडेंट थे. इसलिए नहीं कि वे पढ़ने में अच्छे थे. बल्कि वे शुरू से ही उनका काफी सहयोगी स्वभाव था.
सलमान खान ने स्वीमिंग, साइकिलिंग अपनी मां से सीखा. मां सलमा खान को इन चीजों का काफी शौक था.सलमान 18 साल से पहले ही जीप घूमाते थे.हालांकि पिता सलीम खान से उन्हें इस बात को लेकर कई बार मार भी पड़ी है.
कम अंक लाने पर भी सलमान की खूब पिटाई हुआ करती थी.



 फिल्मी बातें
भारत की पहली मोशन फिल्म द रेस्टलेर्स  हरिशचंद्र सकाराम भाटवेदेकर ने बनाई थी.
जीतेंद्र की पहली फिल्म नवरंग थी. इस फिल्म में उन्होंने संध्या के बॉडी डबल की भूमिका निभायी थी.
जॉय मुखर्जी ने फिल्म शार्गिद के गीत दुनिया पागल है...के लिए हांगकांग के नाइटक्लब के डांसर से डांस सीखा था.
फिल्म लगान में अब तक के सबसे ज्यादा ब्रिटिश कलाकारों ने काम किया है.
मदन मोहन बहुत अच्छे कुक थे और वे अपने कंपोजर के साथ गीत बनाने से पहले जम कर पार्टी किया करते थे.

मैं और मेरे सुपरस्टार्स-11


इस बार  अभिनाज सोनू , पटना से नीरज और रांची की ममता कुमारी अपनी पसंदीदा अभिनेत्री असिन से पूछ रहे हैं सवाल.
अभिराज सोनू : साउथ फिल्मों में काम करने के बाद आपको बॉलीवुड में आकर कैसा लगा?
असिन : मैं बॉलीवुड में आकर काफी खुश हूं, क्योंकि यहां काम करने के अच्छे अवसर मिले. पहली ही फिल्म में आमिर खान के साथ काम करने का मौका मिला. तो काफी अच्छा रहा है करियर. फिर अक्षय, सलमान सभी के साथ काम कर रही हूं. बॉलीवुड और साउथ की फिल्मों में काम करने का तरीका बिल्कुल अलग है. सो, नया एक्सपीरियंस हो रहा है.
ममता :बॉलीवुड की क्या बातें आपको नापसंद है?
असिन : मुझे सजना संवरना बहुत ज्यादा पसंद नहीं था. साउथ में मीडिया भी इन बातों पर खास ध्यान नहीं देती. लेकिन बॉलीवुड में फैशन स्टेटमेंट को लेकर काफी लोग ध्यान देते हैं और मुझे ये सब आता नहीं था तो पहले काफी बातें सुननी पड़ती थी. अब धीरे धीरे मैं ये सब सीख रही हूं और मुझे बॉलीवुड की यही बात पसंद नहीं है. दूसरी बात यह है कि हम साउथ में सुबह से शाम काम करते हैं. बॉलीवुड में सुबह ही 12 बजे होती है. तो ये मेरे लिए रुटीन से अलग हट कर है. तो ये भी दिक्कत शुरू में मुझे काफी होती थी.
नीरज : आप कोई महिला प्रधान फिल्में क्यों नहीं कर रहीं?
असिन : मुझे कमर्शियल मसाला फिल्में करने में मजा आता है. मुझे नहीं लगता कि अभी मैं उस लेवल पर पहुंच गयी हूं कि बस पूरी फिल्म मुझ पर केंद्रित हो. हां, मैं करूंगी. लेकिन कुछ दिनों बाद. फिलहाल साउथ और बॉलीवुड की फिल्मों में सामांजस्य बनाने की कोशिश कर रही हूं.
 एक्सट्रा शॉट
असिन को फिल्म गजनी से पहले भी बॉलीवुड की फिल्में आॅफर होती रही थीं. लेकिन उन्होंने हां नहीं कहा था.
असिन पहले बिजनेस में अपने परिवार का हाथ बंटाती थी.
असिन को घर पर उनके पिता प्यार से मैरी बुलाते हैं. मैरी असिन की दादी का नाम था.
असिन ने अभिनय से पहले मॉडलिंग में काफी काम किया है. 

मैं और मेरे स्टार्स -10

अमिताभ बच्चन से रांची के कुणाल पूछ रहे हैं सवाल

कुणाल: आपके माता-पिता ने पहले आपका नाम इनकलाब क्यों रखा था?
अमिताभ : मेरी माताजी तेजी बच्चन जी ने मेरा यह नाम रखा. वह स्वतंत्रता सेनानी थीं. काफी एक्टिव रहती थीं. वह गर्भावस्था में होने के बावजूद वह हिस्सा बनती थीं. वह उस वक्त भी देश का ख्याल करती थीं. तो मेरे माताजी और पिताजी के दोस्तों ने माताजी को और पिताजी को चिढ़ाना शुरू कर दिया था कि जब बच्चे का जन्म हो तो उसका नाम इनकलाब ही रख देना और उन्होंने ऐसा किया भी.
कुणाल : अपनी पोती आराध्या के बारे में कुछ बताएं
 अमिताभ : आराध्या अपना आइपैड खुद चलाती हैं और उसको ऐसा करते देख कर हम बहुत आश्चर्य में पड़ जाते हैं कि डेढ़ साल की उम्र में वह कैसे इतना समझ पाती हैं. वह अपने लिए गेम खोज कर निकाल लेती हैं. मुझे अदभुत लगता है यह.
extra shot :
 अमिताभ बच्चन ने अपनी पहली फिल्म सात हिंदुस्तानी में जो किरदार निभाया था वह रांची का रहनेवाला था. उस वक्त रांची बिहार का हिस्सा थी. 

मैं और मेरे सुपरस्टार्स-9

इस बार सपना तोमर रणबीर कपूर से पूछ रहे हैं सवाल
सपना : आपका ड्रीम रोल क्या है?
रणबीर : मैं अपने पापा या दादाजी की किसी फिल्म का किरदार निभाना चाहूंगा.
सपना : रॉकस्टर में अभिनय के लिए आपने क्या खास तैयारी की. किस तरह आपने उसे परदे पर उतारा कि वह रणबीर नहीं बस जॉर्डन लगा. और आजतक हमारे दिलों दिमाग पर छाया है.
रणबीर : रॉकस्टार में मैं जो भी नजर आया. वह सिर्फ और सिर्फ इम्तियाज सर की देन है. उन्होंने मुझे उसमें जीने की जो आजादी दी. वह मैं कभी भूल नहीं सकता. वह मुझे हर किरदार के साथ जीने को कहते थे. मैंने इस फिल्म के दौरान आम लोगों की तरह रहना सीखा. जर्नाधन बनने के लिए मैंने गाय का दूध भी दूहा. मैं मजारों पर रहा. वहां वक्त बिताया. एक रॉकस्टार की जिंदगी का क्या दर्द होता है. सब सीखने समझने की कोशिश की. शायद उस किरदार को मैंने जितना फील करके निभाया इसलिए लोगों ने भी उसे महसूस किया.
सपना : कोई ऐसा प्रशंसक जिससे मिल कर आपको बहुत खुशी हुई हो?
रणबीर : हर प्रशंसक मेरे लिए खास हैं. मैं जब पापा को देखता था कि कभी कभी वह फैन को डांट दिया करते थे. तो उस वक्त मैंने तय किया था कि मंै कभी अपने प्रशंसकों को नहीं डाटूंगा. और वह जब भी कहते हैं. मैं तसवीरें खींचवाने के लिए तैयार रहता हूं. मुझे वैसे प्रशंसकों से मिल कर अच्छा लगता है. जो मेरी काम की कद्र करें. न कि मेरी पर्सनल जिंदगी के बारे में पूछें.
सपना : मेरा नाम जोकर बनी तो आप महान जोकर का किरदार निभाने के लिए क्या करेंगे?
रणबीर : पहली बात तो मुझे नहीं लगता कि मेरा नाम जोकर जैसी क्लासिक फिल्मों को दोबारा बनाया जा सकता है. और जो दादाजी ने कर दिया है. उसका एक पर्सेंट भी मैं कर पाऊंगा. हां, मगर जो भी निर्देशक उस फिल्म को बनायेगा. मैं उसे अपने आपको 100 प्रतिशत सौंप दूंगा. मैं डायरेक्टर्स एक्टर्स हूं. वह मुझे जोकर बनाने के लिए जो भी कोशिश करेंगे. और जो भी कहेंगे. मैं वह सबकुछ करूंगा. फिर चाहे मुझे सर्कस की सारी चीजें सीखनी क्यों न हो.

फिल्मी बातें : 
1.आर्देशर ईरानी की फिल्म आलम आरा को काफी सफलता मिली थी और 30 के दशक तक फिल्म इंडस्ट्री ने 200 फिल्मों का निर्माण कर लिया था.
2. लगान पहली बॉलीवुड की फिल्म थी, जिसका प्रदर्शन चीन में भी हुआ था.
3. राजेश खन्ना हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार थे, जिन्होंने लगातार कई हिट फिल्में दी थी. 70 के दशक में उनकी फिल्में अमरदीप, फिर वही बात, बंदिश थोड़ी सी बेवफाई, कुदरत, अशांति, अवतार, अगर तुम न होते, जानवर, इंसाफ मैं करूंगा जैसी फिल्में हिट रहीं.
4. रिफ्यूजी हिंदी सिनेमा की सबसे लंबी अवधि वाली फिल्मों में से एक है. यह फिल्म 4 घंटे 25 मिनट की अवधि की फिल्म है.
5. मंसूर पटौदी खान कभी सिम्मी गेरेवाल के साथ डेटिंग किया करते थे. बाद में मंसूर ने शर्मिला टैगोर से निकाह किया.
स्टोरी
जाना था जापान पहुंच गये चीन...
्रंअशोक कुमार, सलीम खान, देव आनंद जैसी कई हस्तियां दरअसल, मुंबई कुछ और सपने लेकर आये थे. लेकिन उन्हें मंजिल कहीं और ही मिली. हिंदी सिनेमा की कुछ ऐसी ही हस्तियों पर अनुप्रिया की एक नजर
सलीम खान
हाल ही में सलीम खान ने करन जौहर के शो में स्वीकारा कि उनकी इच्छा थी कि वह एक्टर बने और उन्होंने कई फिल्मों में काम भी किया शुरुआती दौर में. लेकिन कुछ दिनों के बाद ही वह समझ गये थे कि किसी एक्टर का जब तक लोगों से वह कनेक् शन न जुड़े वह एक्टर नहीं बन सकता. और उन्होंने रास्ता बदल लिया. दरअसल, हिंदी सिनेमा में कुछ इसी अंदाज में कई शख्सियतों की जिंदगी बदली. जो निर्देशक बनना चाहते थे. एक्टर बन गये और जो एक्टर वह सिंगर, लेखक या भी कुछ और. फिल्म चलती का नाम गाड़ी फिल्म का यह गीत जाना था जापान पहुंच गये चीन इन शख्सियतों पर फिट बैठता है.
अशोक कुमार
अशोक कुमार की इच्छा थी कि वह विदेश जायें और अपनी पढ़ाई पूरी करें. बांबे टॉकीज के माध्यम से लोगों को विदेश भेजा जाता था. तो अशोक कुमार को लगता था कि उन्हें भी विदेश जाने का मौका मिलेगा. उन्होंने इसी लालच में लैब अस्टिेंट की नौकरी कर  ली थी. लेकिन बाद में उन्हें बांबे टॉकीज के माध्यम से ही फिल्मों में अभिनय करने का मौका मिला.
देव आनंद
देव आनंद जब मुंबई आये चो वह चर्चगेट में एक मिलट्री सेंसर आॅफिर की नौकरी किया करते थे और अभिनय से उनका दूर दूर तक कोई संबंध नहीं था. लेकिन जब उन्होंने अशोक कुमार की कुछ फिल्में देखी तो उन्हें लगा कि उन्हें भी अभिनय ही करना चाहिए.उन्होंने प्रभात फिल्म स्टूडियो के बाबू राव पाई से मुलाकात की और कहा कि चाहे जो हो मुझे आपको काम देना ही होगा. उन्होंने देव आनंद की आंखें देखी और उन्हें विश्वास हो गया कि वह कमाल करेगा. सो, उन्होंने प्रभात फिल्मस की हम एक हैं में हिंदू लड़के की भूमिका निभाने का मौका दिया.
मुकेश
मुकेश कभी सिंगर नहीं बनना चाहते थे. बल्कि उनकी इच्छा थी कि वह अभिनय करें. लेकिन मोतीलाल की बहन की शादी में एक बार मुकेश ने गाना गाया और उस वक्त मोतीलाल ने ही उनकी प्रतिभा को पहचाना. मुकेश को निर्दोष फिल्म में काम करने का मौका भी मिला. लेकिन बात नहीं बन पायी. बाद में उन्हें मोतीलाल ने  पहली नजर फिल्म में गाने का मौका दिया और इसके बाद लगातार मुकेश गाते रहे.
जावेद अख्तर
सलीम खान की तरह जावेद अख्तर भी फिल्मों में अभिनय करने आये थे. लेकिन उन्हें मौके नहीं मिले. उन्होंने अस्टिेंट के रूप में काम किया. बाद में उन्हें धीरे धीरे लेखक के रूप में पहचान मिली.
्रॅगुलजार
गुलजार शुरुआती दौर में मुंबई में कार मेकेनिक के रूप में काम किया करते थे. बाद में वह धीरे धीरे गाने लिखने लगे. फिर उनकी दिलचस्पी निर्देशन में बढ़ी. लेकिन उनके लिखी पंक्तियां लोगों को बहुत पसंद आने लगी. और कई नामचीन हस्तियों ने उसी दौर में गुलजार से कई गीत लिखवाये. 

मैं और मेरे सुपरस्टार्स-8


इस बार माही गिल से मयंक राज  पूछ रहे हैं सवाल
मयंक : आपने यह कब महसूस किया कि आपको फिल्मों में आना चाहिए?
माही : थियेटर करना मुझे हमेश से पसंद था. मैंने पंजाब यूनिवर्सिटी के थियेटर डिपार्टमेंट से एक्टिंग सीखी है. और मैं बहुत खुश हूं कि जिस तरह मुझे फिल्मों में मौके मिल रहे हैं वह मेरे लिए अच्छा है.
मयंक : आपके शुरुआती दिनों के अनुभव बताएं?
माही : शुरुआती दिनों में जैसे हर नयी और बाहरी लड़की को कहीं से आने पर काफी मेहनत और स्ट्रगल करनी पड़ती है. मुझे भी करनी पड़ी. लेकिन अनुराग कश्यप ने मेरी प्रतिभा को पहचाना और मुझे देव डी जैसी फिल्मों में काम करने का मौका दिया. यह बड़ी बात थी. शुरू शुरू में कुछ लोगों ने कहा था कि मैं एक्टिंग नहीं कर पाऊंगी. लेकिन देव डी, साहेब बीवी... आने के बाद उनके ये सारे भ्रम दूर हुए. मैं शुरू में बहुत इंट्रोवर्ट थी. कम बोलती थी. शायद इसलिए खुल कर काम मांगने में दिक्कत होती थी.
मयंक राज : आपको अगर देव डी से उलट देवदास आॅफर होती तो कैसा महसूस करतीं और क्या वह किरदार निभातीं?
माही : हां, जरूर निभाती. उसमें भी अपनी छाप छोड़ जाती जो चंदा के किरदार में छोड़ी.
मयंक राज : आप तिग्मांशु धूलिया की फिल्मों की हीरोइन मानी जाती हैं. आप इस बात से कितनी सहमत हैं?
मैं यहां काम करने आयी हूं और जैसे जैसे अच्छे अवसर मिलते जायेंगे. मैं करूंगी. अनुराग कश्यप और तिग्मांशु दो ऐसे निर्देशक हैं जिन्होंने मेरी प्रतिभा को निखारा है और मैं दोनों की बहुत इज्जत करती हूं.
एक्सट्रा शॉट : माही गिल का असली नाम रिंपी कॉर गिल है.
अनुराग पहले फिल्म देव डी में  माही को पारो के रूप में कास्ट करना चाहते थे.
माही ने फिल्मी करियर की शुरुआत हवाएं फिल्म से की थी.


मैं और मेरे स्टार्स -7


इस बार अमरजीत प्रकाश और शांतनु आमिर खान से पूछ रहे हैं उनके पसंदीदा सवाल
अमरजीत प्रकाश : पहले तो आपको बहुत बहुत बधाई आपकी फिल्म धूम 3 ने सक्सेस की सीढ़ियां चढ़ी एक बार फिर
अमरजीत : आपका टीवी शो सत्यमेव जयते फिर से कब आयेगा
आमिर: जल्द ही. हमारी टीम इस पर काम कर रही है. और हमारी कोशिश है कि हम फिर से बहुत सारे इश्यूज लेकर आयें और खासतौर से वैसे इश्यूज जो बेहद जरूरी है लोगों के सामने लाने के लिए.
2. अमरजीत :  आप फिल्में कम करते हैं. तो जब भी कोई काम करते हैं तो कैसा महसूस करते हैं.
आमिर : मैं कोई भी काम दिल से करता हूं. हड़बड़ी में तो बिल्कुल नहीं. मैं आंकड़ों में नहीं फंसता. इसलिए मैं उन पर ध्यान नहीं देता. मैं एक साथ कई काम नहीं कर सकता. जब किसी काम के साथ जुड़ता हूं तो समझ लो कि मैं दिल से जुड़ा हूं. मुझे आज भी तलाश के गाने अपने कानों में गूंजते सुनाई देते हैं. तो इसका मतलब है कि वह फिल्म मेरे दिल के करीब थी और है. और मैं काम करते वक्त दुनिया की तमाम चीजों को भूल कर बस काम ही करता हूं.
3. शांतनु : आपको किस बात से सबसे ज्यादा डर लगता है?
आमिर : मुझे अपनों को खोने से सबसे ज्यादा डर लगता है. कभी कभी मैं डर कर काफी रोने भी लगता हूं. शायद यह मुझे शोभा नहीं देती. लेकिन फिर भी मैं ऐसा ही करता हूं. चूंकि मैं अपने इमोशन को छुपा नहीं पाता.
4. शांतनु : धूम 3 जैसी फिल्में करने के दौरान क्या क्या सीखा?
काफी कुछ. मैं टैप डांसिंग इसी फिल्म से सीखा. इतना फिजिकल वर्क इसी फिल्म में किया. 

फिल्मी बातें

मैं और मेरे स्टार्स-6

इस बार कन्हैया और दीपक पूछ रहे हैं अजय देवगन से अपने पसंदीदा सवाल
कन्हैया : अजय, इन दिनों आपने अपना पूरा लुक बदल लिया है. पहले की फिल्मों में आप अलग ही नजर आते थे. तो इसकी कोई खास वजह?
अजय : कोई खास वजह नहीं है. हर कोई वक्त के अनुसार फैशन में बदलाव लाता ही है. सो, मैंने भी लाया है. मुझे लगता है कि अब मैं खुद पर ज्यादा ध्यान देने लगा हूं. थोड़ी बहुत समझ हो गयी है फैशन की. फिल्मों ने रंग बदला है तो हर चीज का कलेवर बदलना तो लाजिमी ही है.
कन्हैया : आपकी आनेवाली फिल्म कौन है?
अजय : एक् शन जैक् सन और सिंघम 2
कन्हैया : पुरानी फिल्मों की तरह एक् शन क्यों नहीं करते?
मुझे तो लगता है कि मेरे एक् शन का स्टेटस और अच्छा  हुआ है. मुझे यकीन है कि लोगों को मेरा यह नया लुक ज्यादा पसंद आता होगा. और मुझे अच्छे कांप्लीमेंट्स भी मिलते हैं. अब तो नये नये तरीके के एक् शन होने लगे हैं. पहले तो घिसे पिटे ही होते थे.
दीपक : घर पर बॉस कौन है आप या काजोल?
अजय : काजोल ही है.
दीपक : जख्म जैसी फिल्में क्यों नहीं करते?
कोई वैसी स्क्रिप्ट लेकर नहीं आता . जिस दिन आयेगा. जरूर करूंगा वह फिल्म
एक्स्ट्रा शॉट
अजय देवगन का असली नाम विशाल वीरु देवगन है
किसी दौर में अजय रवीना टंडन को काफी पसंद किया करते थे.
फिल्म फूल और कांटे से उनकी शुरुआत हुई थी और उन्होंने लगातार एक साथ कई हिट फिल्में दी थीं.




फिल्मी बातें
1.देव और सुरैया के बीच रोमांस फिल्म विद्या के एक गीत किनारे किनारे चले जायेंगे गाने की शूटिंग के दौरान शुरू हुई थी.फिल्म देव ने जीत के सेट पर उन्हें 3000 की डायमंड की अंगूठी देकर प्रपोज किया था.
2.दिलीप कुमार पहले कामिनी कौशल को पसंद करते थे. लेकिन कामिनी कौशल के भाई आर्मी में थे और उनकी वजह से दोनों के प्रेम पर वही विराम लग गया.
3. नूतन ने 14 साल की उम्र में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी. अपनी मां शोभना सामर्थ की फिल्म में उन्होंने पहली बार काम किया था.
4. मीना कुमारी के पिता ने मीना कुमारी को जन्म के बाद एक अनाथ आश्रम में रख दिया था. चूंकि उस वक्त उनकी आर्थिक स्थिति बिल्कुल दयनीय थी. बाद में कुछ दिनों के बाद वे अपनी बेटी को वापस लेने आये थे.
5. मीना कुमारी फिल्मों में नहीं बल्कि हिंदी साहित्य में अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाना चाहती थीं.

फिल्में मेरा शौक हैं : फरहान अख्तर

           

निर्माता, निर्देशक,अभिनेता, लेखक, गायक फरहान अख्तर इन दिनों अभिनेता के तौर पर इंडस्ट्री में अपनी जगह पुख्ता कर चुके हैं. भाग मिल्खा भाग के लिए इन दिनों हर एवार्ड समारोह में जमकर पुरस्कार बटोर रहे फरहान जल्द ही कॉमेडी फिल्म शादी के साइड़ इफेक्टस में नजर आएंगे. वे अभिनेता के तौर पर अलग अलग किरदारों और जॉनर की फिल्मों के जरिए खुद को चुनौती देना चाहते हैं. 
 
मेरा किरदार भगौडे किस्म का:  
 यह फिल्म तृषा(विद्या बालन) और सिद्धार्थ(मैं) की कहानी है. शादी और फिर बच्चे के बाद इनकी जिंदगी में किस तरह से प्यार गायब हो जाता है इसी की कहानी यह फिल्म है. जहां तक मेरे किरदार की बात है सिद्धार्थ भगौडे किस्म का है जो हर परिस्थितियों से भागता रहता है. उसकी अपनी काल्पनिक दुनिया है और वह उसी में रहना चाहता है. उसे लगता है कि शादी के बाद उसका बैचलरहुड खत्म हो गया है. जिम्मेदारियों के नाम पर वह म्यूजिशियन बनने का अपना सपना कहीं खो बैठा है. उसे लगता है कि शादी और फिर बच्चे ने उससे उसकी सभी खुशी और सपने छीन लिए हैं.

शादी नहीं जिम्मेदारियां जिंदगी बदलती है: मेरा मानना है कि शादी नहीं उससे जुड़ी जिम्मेदारियां जिंदगी बदलती हैं. जिम्मेदारियां हर कोई नहीं निभा सकता है. यही वजह है कि लोग शादी को दोष देने लगते हैं खुद को दोष नहीं देते हैं.

सफल शादी के मंत्र: सफल शादी के मंत्र आप हमेशा सॉरी बोलने को तैयार रहें फिर चाहे गलती आपकी पत्नी की ही क्यों न हो. मजाक कर रहा था. हकीकत में अगर आपको अपनी शादी को सफल बनाए रखना है तो अपने पार्टनर की जिन खूबियों की वजह से आपने उससे शादी की थी. उसे हमेशा याद रखिए और छोटी मोटी गलतियों को नजरअंदाज करना सीखें.

ग्लैमर वर्ल्ड में शादियां नहीं टिकती गलत धारणा: 
इन दिनों ग्लैमर वर्ल्ड की एक दो शादियां टूट गयी है तो उससे एक बहस ही शुरु हो गयी है. उस बहस के बारे में मैं एक शब्द में कहूं तो हमें दूसरी की निजता का सम्मान करना चाहिए इसलिए मैं किसी की भी पर्सनल लाइफ पर कमेंट करना पसंद नहीं करता हूं. जहां तक बात ग्लैमर वर्ल्ड की है तो ग्लैमर इंडस्ट्री से जुड़े होने की वजह से शादियां चलती है या नहीं चलती ऐसा नहीं है.  मुझे लगता है कि इंसान इंसान होते हैं. उनके प्रोफेशन से उनका कुछ लेना देना नहीं होता है. यह पूरी तरह से गलत धारणा है.

 मेरी शादी पर भी हुई है टीका टिप्पणी: 
शादियों के बनने या टूटने से पहले मीडिया की रिपोर्ट पहले ही शुरु हो जाती है. इनकी शादी होने वाली हैं. इनकी शादी टूटने वाली है. मैं भी ऐसे खबरों से दो चार हुआ हूं कि मेरा और मेरी पत्नी अधूना के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है और भी न जाने क्या क्या लेकिन मैंने इन सब पर रिएक्ट नहीं किया आखिरकार थककर गॉसिप करने वाले रुक ही गए थे. अधूना और मैं पति पत्नी होने के अलावा एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त भी हैं. दोस्ती का रिश्ता विश्वास का होता है.  यही वजह है कि मैं अधूना पर आंख बंद करके विश्वास कर सकता हूं. वह भी मुझ पर उतना ही भरोसा करती है.

विद्या प्रोफेशनल एक्टर: विद्या की जितनी तारीफ की जाए कम है. यह उनके साथ मेरी पहली फिल्म है. विद्या एक बहुत अच्छी को स्टार होने के अलावा काफी प्रोफेशनल स्टार हैं. यह बात मेरे लिए बहुत मायने रखती है क्योंकि मुझे प्रोफेशनल लोग बहुत पसंद है.इसके अलावा वह काफी खुशमिजाजमहिला हैं सो काफी चीजेंऔर आसान हो जाती हैं. काम करने में मजा आता है.


 एक्टिंग डायरेक्शन सब करना चाहता हूं:  मैंने जब से अभिनय शुरु किया है. यह चर्चा शुरु हो गयी है कि अब मैं निर्देशन नहीं करने वाला हं. सच कहूं तो मैं एक्टिंग डायरेक्शन सब करना चाहता हूं. फिल्में मेरा शौक है.  मैं हमेशा फिल्मों से जुड़ा रहना चाहता हूं. फिल्म का निर्देशन और लेखन हीं मेरी ताकत है. मैने दिल चाहता है,लक्ष्य और  डॉन  जैसी फिल्में बनायी तब मुझे लगा कि मुझे अभिनय के क्षेत्र में भी काम करना चाहिए. मै फिल्मों में काम करके बेहद खुश हूं. हां फिलहाल  अभिनेता के रूप में मेरा अनुभव काफी अच्छा रहा है. मै आगे भी काम करते रहना चाहता हूं. जहां तक निर्देशन की बात है तो उसके लिए मुझे समय चाहिए. मुझे पढ़ना पढेगा. जो चीजें मुझे प्रभावित करेंगी. उस पर कहानी लिखूंगा दैन मैं निर्देशन के बारें में सोचूंगा.

मसाला फिल्मों से परहेज नहीं: मुझे किसी भी काम से कोई परहेज नहीं है. मैं नेवर शे नेवर एटिट्यूड़ में विश्वास करता हूं. हो सकता है कि भविष्य में मुझे ऐसी कोई फिल्म मिले जिसमें मैं स्पूफ के तौर पर साइलेंट हो नहीं तो मैं वाइलेंट हो जाऊंगा जैसे डायलॉग बोलता नजर आऊं. आप कब क्या करेंगे आपको भी पता नहीं होता है.


एक्टिंग करते हुए डायरेक्टर दूर रखता हूं: 
मैं डायरेक्टर हूं इसका मतलब यह नहीं कि एक्टिंग करते हुए मैं अपने डायरेक्टर को यह सीखाता रहता हूं कि यह सीन ऐसे शूट करो. वह वैसे. दरअसल एक्टर का डाइरेक्टर पर हावी होना संभव ही नहीं है क्योंकि स्क्रि प्ट महीने पहले लॉक हो जाती है और साथ ही डाइरेक्टर कोक्या चाहिए वह पहले ही एक्टर को बता देता है. यकीन कीजिए शूटिंग शुरू होने से पहले दोनों के बीच इतनी बातें हो चुकी होती है कि शूटिंग के दौरान किसी तरह कीतनातनी नहीं होती. हां अगर कभी लगता है कि ये सीन ऐसा होता तो ज्यादा अच्छा होता ऐसे में अपनी राय दे देता हूं. मानना न मानना निर्देशक पर ही है. निजी तौर पर मैं एक्टिंग करते हुए अपने अंदर के डायरेक्टर को दूर ही रखता हूं. यह दोनों जिम्मेदारियां मैं एक साथ नहीं निभा सकता हूं.

 मर्द कैंपेन: 
मैंने मर्द के रूप में जो कैंपेन की शुरु आत की थी. उसका उद्देश्य यही था कि हमारे देश के पुरु ष वर्गों को सचेत किया जाये और उन्हें यह बताया जाये कि जो हम कर रहे हैं, वह कितना गलत कर रहे हैं. अगर आप असली मर्द हैं तो महिला की इज्जत करना सीखिए. मर्द होने का मतलब अपनी ताकत दिखा कर किसी का बलात्कार करना नहीं है. किसी का अपमान करना नहीं है. मर्द का मतलब औरतों की इज्जत करना हैयह हमारा मुख्य उद्देश्य था.  मैं इसे सफलता ही मानता हूं कि आपने इस बारें में पूछा. हां, यह सच है कि इतनी सी चीज से हम सबकुछ बदल नहीं लेंगे. लेकिन मैं अवेयरनेस में यकीन रखता हूं. जैसे अवेयर करो तो फिल्में लोगों तक पहुंचती हैं तो मुझे लगता है कि लोगों तक बात भी पहुंचेगी.


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 फिल्मी बातें:
 फिल्म  प्यार किए जा  में कॉमेडियन महमूद ने किशोर कुमार, शशि कपूर और ओमप्रकाश से ज्यादा पैसे लिए थे. अभिनेता और गायक किशोर को यह बात अखर गई. इसका बदला उन्होंने मेहमूद से फिल्म  पडोसन  में लिया. उस फिल्म के लिए उन्होंने डबल पैसे लिए थे.
 - निर्देशक सुभाष घई ने राजेश खन्ना स्टारर फिल्म अराधना में कैमियों की भूमिका की थी. वे इंडस्ट्री में अभिनेता बनने के लिए आएं थे.
- फिल्म दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे में राज मल्होत्रा के किरदार के लिए निर्देशक आदित्य चोपड़ा की पहली च्वॉइस हॉलीवुड एक्टर टॉम क्रूज थे.

- इंटरनेट का उपयोग करने वाले शम्मी कपूर पहले भारतीय कलाकार थे. इंटरनेट जब भारत में आया तो वे इसका उपयोग करने वाले गिने-चुने लोगों में से एक थे.

चित्रकार के रूप में अपने करियर की शुरु आत करने वाले सत्यजित रे का इतालवी फिल्म बाइिसकल थीफ देखने के बाद फिल्म निर्देशन की ओर रु झान हुआ था.



 प्रीति पांडे और सुलोचना सिंह के सवाल स्टूडेंट आॅफ द एयर से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले सिद्धार्थ मल्होत्रा के संग: 
 
 हंसी तो फंसी फिल्म में आप इन दिनों नजर आ रहे हैं रियल लाइफ में यह फंडा कभी अपनाया है.
 यह लाइन अक्सर सुनने को मिलती है कि हंसी तो फंसी. हालांकि लडकी के हंसने से वह फंसती तो नहीं लेकिन हां यह लडके के लिए एक पॉजिटिव साइन होता है कि लडकी थोडा भाव दे रही है. वैसे हंसने के बाद भी आपको काफी मेहनत करनी पडती है.

ऐसी मेहनत कभी आपने की है.
मैं अपने मम्मी पापा का बहुत प्यारा लडका था लेकिन पढाई में बहुत बुरा स्टूडेंट था. लड़कियों के मामले में भी मैं बहुत ज़्यादा अच्छा नहीं था. मुझे याद है अपने पहले वैलेंटाइंस डे पर मैंने एक लडकी को गुलाब देने की कोशिश की थी और वह गुलाब देखकर नाराज़ हो गयी थी क्योंकि मैंने उसे लाल की जगह सफेद गुलाब दे दिया था. तब मुझे यह नहीं पता था कि वैलेंटाइंस डे पर लाल गुलाब दिया जाता है ना कि सफेद. दरअसल मैं जब फूलों के दुकान पर गया था तो वहां सफेद गुलाब काफी फ्रेश थे सो उनकी फ्रेशनेस के आधार पर मैंने उसे ले लिया. हालांकि इससे मुझे एक सबक मिला कि गुलाब फ्रेश हो या ना हो लेकिन उसका लाल होना बहुत ज़रूरी है.

आपके अनुसार एक्टर के लिए खूबसूरती कितने मायने रखती है 
बहुत ज्यादा नहीं क्योंकि कई  बार लोगों को लगता है कि अच्छा दिखता है इसका मतलब एक्टर अच्छा नहीं होगा.

अभी हाल ही में आपने रणबीर कपूर को अपना प्रतिद्वंदी करार दिया था ऐसा क्यों
 मुझसे एक सवाल में एक नाम पूछा गया कि किसी एक का नाम लो जिसे आप अपना कॉम्पिटिशन मानते हैं. तो मैंने कहा हम सब जानते हैं बॉलीवुड के सभी न्यूकमर्स एक से बढकर एक हैं. मैं, वरु ण, सुशांत, आयुष्मान, रणवीर और अर्जुन कपूर हम सभी एक किरदार में फिट हो सकते हैं सो उनसे मुकाबला हो ही नहीं सकता. फिर भी जैसा कि स्पोटर्स में कहते हैं कंपीट विद् बेस्ट सो उसी तर्ज पर मेरे अनुसार अभी रणबीर कपूर बेस्ट हैं और मैं उनसे मुकाबला करना चाहूंगा.

आपकी आनेवाली फिल्में 
जून में मोहित सूरी की द विलेन रिलीज होगी. इसके अलावा रेमो डिसूजा की एक अनटाइटल फिल्म है.  
  

पा का सहारा


फिल्म आर राजकुमार में सोनाक्षी सिन्हा ने खामोश शब्द का बार बार इस्तेमाल किया है. दरअसल, सोनाक्षी ही नहीं स्टार पुत्र पुत्रियां अपने पिता की विरासत को अपनी धरोहर समझते हैं और अपना एकाधिकार मानते हैं. चूंकि उनके माता पिता जिस दौर में लोकप्रिय रहे. उनका अंदाज भी लोकप्रिय हुआ. स्टार पुत्र पुत्रियां अपने माता पिता की इस ख्याति का इस्तेमाल अपनी लोकप्रियता के लिए बिंदास अंदाज में करते नजर आते रहते हैं.  

 खामोश -सोनाक्षी
सोनाक्षी सिन्हा के पिता शत्रुघ्न सिन्हा  जिस दौर में फिल्मों में सक्रिय रहे. उन्होंने फिल्मों में खामोश शब्द का प्रयोग सबसे अधिक किया था. और बाद के दौर में यही शब्द उनकी पहचान बन गयी. सिर्फ इस शब्द के इस्तेमाल से ही लोगों को यह जानकारी मिल जाती है कि उस बात का कहीं न कहीं से कोई न कोई ताल्लुक शत्रुघ्न सिन्हा से है ही. हालांकि शत्रुघ्न सिन्हा को यह बिल्कुल पसंद नहीं कि कोई आमतौर पर उनका मजाक उड़ाये. लेकिन अपनी बेटी को उन्होंने यह अधिकार दे रखा है. सो, सोनाक्षी अपनी हर फिल्म में इस शब्द का जम कर इस्तेमाल करती हैं. फिर चाहे वह फिल्म दबंग हो या आर राजकुमार. वे आमतौर पर भी फिल्मी समारोह में इस शब्द का इस्तेमाल करती रहती हैं. निस्संदेह उन्हें इससे उन दर्शकों से जुड़ने का मौका मिल जाता है, जो शत्रुघ्न के दौर के रहे हैं और उनके प्रशंसक भी.
अभिषेक बच्चन बोल बच्चन
फिल्म बोल बच्चन में अमिताभ बच्चन ने बोल बच्चन नामक गाने पर परफॉर्म करना सिर्फ इसलिए स्वीकार किया था, क्योंकि उस फिल्म में अभिषेक बच्चन थे. फिल्म का पहले नाम बोल वचन था. लेकिन अभिषेक के जुड़ने से फिल्म का नाम बोल बच्चन हो गया. और अभिषेक बच्चन ने फिल्म में जम कर अपने पिता अमिताभ बच्चन के लोकप्रिय संवाद और अंदाज को दोहराया. शुरुआती दौर में भी जब अभिषेक फिल्मों में आये थे. वे उत्तर प्रदेश की फिल्मों में अधिक काम करते थे और शुरुआती दिनों की उनकी फिल्मों में अमिताभ बच्चन की फिल्मों से जुड़े संवाद जरूर होते थे.
जीतेंद्र की कॉपी तुषार
तुषार कपूर ने कई फिल्मों में अपने पापा की कॉपी करने की कोशिश की है. वे जीतेंद्र की तरह डांस स्टेप करते कई फिल्मों में नजर आये हैं. साथ ही पापा की तरह सफेद कपड़ों में भी वे कई फिल्मों में नजर आये हैं. आये दिन टेलीविजन शोज में भी वे पापा की कॉपी करते नजर आते हैं.
रणबीर कपूर की बचना ऐ हसीनो
रणबीर कपूर अपने पापा ऋषि कपूर से हमेशा प्रेरित रहे हैं और उन्हें जब भी मौका मिलता है. वे अपने पिता की नकल करने में ंिहचकते नहीं हैं. उन्होंने बचना ऐ हसीनो फिल्मों में बचना ऐ हसीनों नामक गाने पर परफॉर्म किया. जिस पर कभी ऋषि कपूर ने परफॉर्म किया था. रणबीर इसे हर बार ट्रीब्यूट का नाम दे देते हैं. ऋषि और रणबीर ने एक बार आइफा अवार्ड में साथ साथ इसी गाने पर परफॉर्म भी किया.
बॉबी देओल  ने की शोले की कॉपी
बॉबी देओल ने अपनी शुरुआती फिल्मों में अपने पिता धर्मेंद्र की लोकप्रिय संवादों का सहारा लेने की हमेशा कोशिश की. बॉबी ने फिल्म बरसात, अजनबी जैसी फिल्मों में फिल्म शोले में धर्मेंद्र का लोकप्रिय संवाद कुत्ते मैं तेरा खून पी जाऊंगा...जैसे संवाद कई बार दोहराये. धर्मेंद्र के अन्य संवाद भी फिल्मों में इस्तेमाल होते रहे हैं. यही नहीं बॉबी और सनी ने मिल कर तो धर्मेंद्र के लोकप्रिय गीत यमला पगला दीवाना पर ही फिल्मों का नाम भी रखा. फिल्म के शीर्षक के लिए यह शब्द चुनने की वजह यही थी कि बॉबी और सनी भी जानते थे कि दर्शक इससे जुड़ पायेंगे. यमला पगला दीवाना ने सनी और बॉबी के डूबते करियर को सहारा दिया तो इसका एक बड़ा श्रेय उनके पिता धर्मेंद्र को भी जाता है.
जगदीप -जावेद जाफरी
हाल ही में जगदीप जावेद जाफरी के शो बुगी वुगी में शामिल हुए. इससे पहले भी जावेद जाफरी ने कई बार फिल्मों में अपने पिता के अंदाज में उनके संवादों को दोहरा कर लोकप्रियता बटोरी है.


इनके अलावा आये दिन फिल्मों में पुराने दौर के कलाकारों को उनके पुराने अंदाज में प्रस्तुत करने की कई बार कोशिशें होती रहीं हैं. जैसे फिल्म हाउसफुल 2 में रणजीत का लोकप्रिय अंदाज का इस्तेमाल किया गया है.फिल्म बोल बच्चन में असरानी का अंगरेजों के जमाने के जेलर वाले संवाद का इस्तेमाल किया गया. मिथुन को प्राय: फिल्मों में डिस्को डांसर के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है. 

मैं और मेरे स्टार्स -5


 निरमित कुमार  और राहुल श्रीवास्तव  से पूछ रहे हैं उनके पसंदीदा सवाल
  निरमित : आप इतने बड़े सुपरस्टार हैं. आपको कैसा लगता है. जब आप पीछे मुड़ कर देखते हैं?
शाहरुख खान मुझे याद है. मेरे हेडमास्टर ने जाकर अम्मी से कहा था कि शाहरुख कहता है कि वह सुपरस्टार बनेगा. तो अम्मी ने कहा था कि शाहरुख कहता है तो सच ही कहता होगा. मेरी अम्मी को भरोसा था कि मैं सुपरस्टार बनूंगा. यह अलग बात है कि वह मेरी यह खुशी देख कर जी नहीं पायी. मां को मैं दिलीप कुमार साहब जैसा लगता था. तो मुझे खुशी है कि मेरी अम्मी का सपना पूरा हुआ. सुपरस्टार बन कर भी मैं आज अपने घर दिल्ली को नहीं भूला. सुपरस्टार बनने की सबसे बड़ी खुशी यही है कि मुझे मेरे परिवार के साथ साथ पूरे दुनिया के लोगों से भी प्यार मिलता रहता है.
निरमित :आपकी आनेवाली अगली फिल्म कौन सी है?
शाहरुख खान : हैप्पी न्यूर और रईस में आप शाहरुख के दो अलग अंदाज देखेंगे.
 निरमित : आप सलमान के साथ किसी फिल्म में करना पसंद करेंगे या दर्शक आप दोनों को कभी साथ में देखेंगे फिर से?
शाहरुख खान : हम दोनों के बीच ऐसी कोई अनबन नहीं है. दोनों अपनी जगह खुश हैं. हम दोनों ने ऐसा कुछ सोच नहीं रखा है कि हमें काम नहीं करना या कुछ भी. इंशाहअल्लाह आनेवाला वक्त दे देगा इस सवाल का जवाब
 राहुल श्रीवास्तव : आप लगातार दीपिका को अपनी फिल्मों में साइन कर रहे हैं. कोई खास वजह?
शाहरुख खान : दीपिका काफी टैलेंटेड अभिनेत्री हैं. मेहनती हैं और कुछ सालों में ही उन्होंने खुद को प्रूव किया है. उन्होंने शुरुआत हमारी फिल्म से की थी और फराह चाहती हैं कि वे फिर से ओम शांति ओम की उस टीम को दोहरायें. निर्णय उनका है और दीपिका जैसी अभिनेत्री के साथ बार बार काम कौन नहीं करना चाहेगा.
 राहुल श्रीवास्तव : आपको चेन्नई एक्सप्रेस से अच्छी लोकप्रियता हासिल हुई? क्या आपने इतनी सफलता की उम्मीद की थी?
शाहरुख खान : जब भी आप कोई काम करते हैं तो आप यही उम्मीद करते हैं कि आपको सफलता मिले. सो, यह तो उम्मीद थी कि रोहित शेट्ठी अच्छी फिल्में बनाते हैं और फिल्म की स्क्रिप्ट काफी अच्छी थी. सो, फिल्म को सफलता मिलनी ही थी.  

इम्तियाज इस फिल्म के हीरो हैं : आलिया


आलिया भट्ट अभी बस एक ही फिल्म पुरानी हुई हैं. लेकिन हाइ वे में वे जिस तरह वह मंझी हुई अभिनेत्री के रूप में नजर आ रही हैं. तसवीर स्पष्ट है कि आनेवाले समय में वह बॉलीवुड की सफलतम अभिनेत्रियों में से एक होंगी. वे चेहरे से जितनी मासूम और नादान-सी नजर आती हैं
 
आलिया, आपकी पहली फिल्म स्टूडेंट आॅफ द ईयर में बहुत ग्लैमर था. लेकिन हाइवे में इसके उलट आप बिना किसी मेकअप, एक अलग ही रूप में नजर आ रही हैं. तो कैसा रहा यह पूरा अनुभव?
 जी हां, यह सही है कि हाइवे मेरी पहली फिल्म स्टूडेंट आॅफ द ईयर से बिल्कुल अलग है. उस फिल्म में हमें लैविश लोकेशन मिले थे और लगभग पूरी फिल्म एक ही जगह पर शूट हो गयी है. जबकि इस फिल्म में मुझे बहुत बहुत सफर करना पड़ा. लेकिन मुझे इसे अनुभव करने में बहुत मजा आया. हालांकि सच कहूं तो मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी. चूंकि पूरी तैयारी तो इम्तियाज ने कर रखी थी. दरअसल, वही इस फिल्म के हीरो हैं. मैं बस मेकअप नहीं करती थी. बालों में कंघी करना मना था. और खासतौर से इम्तियाज ने यह कह रखा था कि एक्टिंग मत करो, जो तुम हो. जैसी हो वैसी ही दिखो. हैटिक था. चूंकि पता नहीं होता था कि अगले दिन शूटिंग कहां होगी. पड़ाव क्या होगा.किस मोड़ पर  क्या होगा. मौसम किस तरह बदलेगा. स्रो से लेकर बारिश तक़ फिर बिल्कुल मरुस्थल से बिल्कुल पहाड़ पर. लेकिन मैं खुश हूं कि मुझे ये सब करने का मौका मिला. मुझे इस फिल्म में इमोशनली, फिजिकली. हर तरह से काम करने में मजा आया. हां, सफर के दौरान काफी बीमार पड़ी. बॉडी में काफी पेन रहता था. लेकिन जो अनुभव मिला वह इस दर्द के बिना शायद ही मिल पाता.लेकिन इम्तियाज उस पेन को भी कैमरे पर रियल तरीके से कैप्चर कर लेते थे. यह फिल्म आपको बिल्कुल बनावटी फिल्म नहीं लगेगी.
इससे पहले  कभी भारत को इस नजरिये से देखा था?
नहीं इससे पहले मैंने भारत को इस नजरिये से न कभी देखा था. न कभी एक्सपीरियंस किया था. मैं जब स्कूल में थी तो शिमला गयी थी.  उस वक्त रोड से ट्रैवल करते थे. टूर पर जाती रहती थी. लेकिन हम दोस्तों में ही इतने बिजी रहते थे. आपस में ही बात करते हुए कि कभी इस तरह से बाहर की सिनरीज या रास्ते को देखते ही नहीं थे. लेकिन इस बार इम्तियाज की नजर से जब ये सब देखा तो काफी एंजॉय किया.
इम्तियाज ने आपको यह फिल्म आपकी पहली फिल्म से पहले ही आॅफर कर दिया था. कैसा लगा था आपको जब यह फिल्म आॅफर हुई?
मैं काफी खुश थी कि मुझे इम्तियाज की फिल्म करने का मौका मिल रहा है. चूंकि मैंने इम्तियाज की सारी फिल्में देखी है और वह जिस अप्रोच से फिल्में बनाते हैं. वह अंदाज बिल्कुल अलग होता है. इसमें कोई संदेह नहीं. वे प्रेम को जिस तरह से प्रेजेंट करते हैं. वैसा शायद ही कोई और निर्देशक करते होंगे. मैंने इम्तियाज की फिल्म जब वी मेट न जाने कितनी बार देखी होगी. मेरी विश लिस्ट में करन जौहर, इम्तियाज अली दोनों थे और दूसरी ही फिल्म में उनका साथ मिलना मुझे बहुत कुछ दे गया. और ऐसे मौके मिलते नहीं हर रोज कि आपको इम्तियाज के साथ काम करने का मौका मिले.
करन और इम्तियाज दोनों के साथ ही आपने काम किया है. आपको दोनों के निर्देशन के अंदाज में क्या विभिन्नताएं नजर आयीं?
इम्तियाज ज्यादा लाइवली हैं. वे लाइव ज्यादा देखते हैं. करन मॉनिटर के पीछे ज्यादा देखते हैं.दोनों का अप्रोच फिल्मों को लेकर अलग है. दोनों का अपना अपना अंदाज है.विषय का चुनाव सबकुछ अलग है दोनों का.
आलिया, हाइवे में पूरी तरह से आप फिल्म की हीरो नजर आ रही हैं. तो कैसी जिम्मेदारियां महसूस कर रही हैं आप?
मुझे तो लगता है कि इस फिल्म  के हीरो इम्तियाज हैं. मैं तो बस फिल्म की कैटेलिस्ट हूं.हां, मगर एक प्रेशर है कि यह मेरी दूसरी फिल्म है. लेकिन साथ ही साथ मैं यह मान रही हूं कि यह फिल्म मुझे अलग तरह की अभिनेत्री के लीग में लाकर खड़ा कर देगा.रणदीप ने मुझसे कहा कि जब वह फिल्में पूरी कर लेते हैं तो वह उस किरदार से खुद को अलग करके दूसरी फिल्म में चले जाते हैं. लेकिन मेरे लिए ऐसा नहीं है. मैं खुद को किरदारों से डिटैच नहीं कर पाती. हाइवे मेरे लिए हमेशा खास फिल्म इसलिए भी रहेगी कि इससे मैंने जिंदगी के वे अनुभव कर लिये जो शायद ही कभी किसी और फिल्म के माध्यम से कर पाती. लेकिन अभी बहुत नयी हूं तो नर्वस हूं.
आपकी पहली फिल्म के दौरान जब आपसे बातचीत हुई थी तो आपने कहा था कि आप स्टार बनना चाहती हैं. लेकिन क्या अब भी आपका जवाब वहीं है.
नहीं अब मैं कहूंगी कि मैं अच्छी एक्ट्रेस बनना चाहंूगी और अब स्टार नहीं सुपरस्टार बनना चाहूंगी. चूंकि मुझे अभी बहुत सारा काम करना है. एक्ट्रेस इसलिए बनना चाहती कि अच्छे काम मिले और सुपरस्टार इसलिए चूंकि उनका एक आॅरा हो जाता है. उस आॅरा को मुझे जीना है. जैसे हम जब सुपरस्टार की बात करते हैं तो उनका नाम लेना ही काफी होता है. जैसे शाहरुख सुपरस्टार हैं तो उनका आॅरा है. लोग उसे देखना चाहते हैं. वह जीना चाहते हैं. मैं भी वही जिंदगी जीना चाहती हूं. इसे आप सुपरस्टार का एट्टीटयूड का भी नाम दे सकते हैं.
इम्तियाज अली के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
मुझे लगता है कि इम्तियाज अली इस बात को सबसे अच्छे तरीके से समझते हैं कि किस तरह वह अपनी कास्टिंग से ही फिल्म को अलग कर देते हैं. उन्हें पता है कि उन्हें क्या नहीं चाहिए. वे अपने कास्ट क्रू का बहुत ख्याल रखते हैं और उनका हर चीज पर कमांड है. अगर बुरे हालात भी आते थे. वह मैनेज करते. उनके दिमाग में उनका राइटर दिमाग चलता रहता है. अगर किसी वजह से तय शॉट नहीं हुए तो वह तुरंत कुछ अलग सोच कर अलग जगह पर शूट कर लेते थे. उनकी सबसे खास बात. उन्हें मेकअप नहीं. काम से मतलब था. वह कहते थे कि आलिया वीरा के किरदार को महसूस करो. कुछ दिन के लिए उसे जीयो. वह खुद भी वह सब कुछ एक्सपीरियंस करते थे. कश्मीर में घास पर सोना. राजस्थान में रेत पर चलना. हरियाणा में वहां की महिलाओं से बातचीत करना सबकुछ बहुत दिलचस्प था. इम्तियाज कहते कि एक्टिंग मत करो. वास्तविक दिखो. सो, मुझे तो वह जीनियस निर्देशक नजर आये.
अब आप एक सेलिब्रिटी बन चुकी हैं. तो आये दिन लींक अप और तरह-तरह की खबरें आती रहती हैं तो इस तरह की खबरों के साथ कैसे डील करती हैं?
मैं उन्हें इग्नोर करती हूं. हालांकि मेरी मम्मी मेरे से पूछती रहती है कि आलिया बताओ न जो बातें हो रही हैं. वह कहां तक सच है. वह मेरे लिए हर मां की तरह फिक्रमंद रहती हैं. मैं बाकी बातों पर तो ध्यान नहीं देतीं. लेकिन हां, बात जब मेरे परिवार की होती है और मेरे परिवार के बारे में कोई उलटी सीधी बातें करता है तो मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता और मैं उस वक्त गुस्से में आ जाती हूं और बहुत सारी बातें सुना जाती हूं. मैं अपना आपा खो देती. ड्रेसिंग सेंस को लेकर खबरें आती हैं तो मुझे लगता है कि उस व्यक्ति से मिलूं जो खबर लिख रहा है और एक बार उसकी ड्रेसिंग सेंस देखूं. फिर बात करूं.
आलिया , जब आप शूटिंग नहीं कर रही होती हैं तो आपको क्या करना अच्छा लगता है?
मुझे खाना, सोना सच कहूं तो होलीडे करना बहुत पसंद है. लेकिन मुझे वक्त कम मिल पाता है. मुझे स्वीमिंग में भी काफी मजा आता है.
आपकी पहली फिल्म के को स्टार वरुण और सिद्धार्थ की भी दूसरी फिल्में आ रही हैं. तो उन्हें प्रतिद्वंदी के रूप में देख रही हैं या दोस्त?
जाहिर सी बात है कि वे मेरे अच्छे दोस्तों में से एक हैं और मैं खुश हूं कि हम तीनों अलग अलग तरह की फिल्में और अपनी मिजाज की फिल्में कर रहे हैं. सिड की फिल्म हंसी तो फंसी मैंने देखी और मैंने तो उसके लिए खूब सीटियां बजायी.
आपकी आनेवाली फिल्में?
हंपटी शर्मा की दुल्हनिया और टू स्टेट्स

 फिल्मी बातें:
 फिल्म पाकिजा की शूटिंग के दौरान मीना कुमारी बुरी तरह बीमार थीं. लेकिन चूंकि उन्होंने फिल्म साइन कर दी थी और वह काम को लेकर प्रतिबध थीं. सो, जब वह फिल्म की शूटिंग पर आतीं, वह बिस्तर पर लेटी रहतीं. कैमरा आॅन होते ही वह निर्जीव से सजीव हो जातीं और भलिभांति अपने किरदार के मुताबिक शॉट देतीं. यह मीना कुमारी
के ही मंझी हुई अदाकारी का ही नतीजा था कि मीना कुमारी बीमार होने के बावजूद बेहतरीन अभिनय कर लेती थीं.
-आशा भोंसले ने अपनी पहली कमाई प्राप्त करने की खुशी में मुंबई के ठेलों पर जाकर गोलगप्पे और वड़ा पाव खाये थे. चूंकि उन्हें इस बात की बेहद खुशी थी कि अब वह भी घर के लोगों की आर्थिक मदद कर पायेंगी और अब वह अपने पैरों पर खड़ी हो गयी हैं.
- गायक उदित नारायण को पहला मौका संगीतकार राजेश रोशन ने दिया था. उदित पहले दिन जब रिकॉर्डिंग स्टूडियो में आये थे बहुत नर्वस थे. संगीतकार राजेश रोशन ने उन्हें चाय पिला कर उनका हौंसला बढ़ाया था.
- ऐ मेरे वतन के लोगों...गीत हम सब लता मंगेशकर की आवाज में सुनते हैं. लेकिन पहले यह गीत आशा भोंसले जी से गवाया जाना तय हुआ था. लेकिन बाद में कुछ विरोधाभास होने की वजह से लता मंगेशकर ने यह गीत गाया.
- किसी दौर में जब पृथ्वी थियेटर काफी नुकसान में था. उस वक्त भी राज कपूर ने वहां के सारे स्टाफ्स को लगातार सैलेरी दी. यह सिलसिला कई सालों तक चला. वहां के स्टाफ को बिना काम किये उनका मेहनताना मिलता रहा.


 कैसे बने रफी नौशाद की पसंद
मशहूर संगीतकार नौशाद अपने अधिकतर गाने तलत महमूद से गवाते थे.  एक बार उन्होंने रिकार्डिंग के दौरान महमूद को सिगरेट पीते देख लिया था. इसके बाद वे उनसे चिढ़ गए और अपनी फिल्म बैजू बावरा के लिए उन्होंने रफी को साइन किया.रफी के बारे में यह माना जाता था कि वे धर्मपरायण मुसलमान थे. वे सिगरेट, शराब तथा अन्य प्रकार के नशे से दूर ही रहा करते थे. इन गीतों ने मोहम्मद रफी को और प्रसिद्ध बना दिया.रफी की गायिकी ने नौशाद पर ऐसा जादू किया कि वे उनके पसंदीदा गायक बन गए.इसके बाद नौशाद ने लगभग अपने सभी गानों के लिए मोहम्मद रफी को गवाया.

 एक रुपये में प्राण ने की थी बॉबी 
परदे पर अपनी खलनायकी के लिए मशहूर प्राण निजी जिंदगी में मददगार और रहमदिल इंसान थे. वे हमेशा दूसरो की मदद के लिए तत्पर रहते थे. उनकी दरियादिली की ढेरों कहानियां हैं. इसी कहानियों में से एक बॉबी फिल्म में मात्र एक रुपया लेकर अभिनय करना भी है. दरअसल वर्ष 1970 में प्रदिर्शत फिल्म मेरा नाम जोकर की असफलता के बाद शो-मैन राजकपूर टीनएज प्रेमकथा पर आधारित बॉबी का निर्माण कर रहे थे. इस फिल्म के लिए प्राण को राज कपूर लेना चाहते थे, लेकिन प्राण उन दिनों बॉलीवुड में सर्वाधिक पैसे लेने वाले कलाकारों में शामिल थे. राज कपूर की वित्तीय हालत उन दिनों अच्छी नही थी, इसलिए वे चाहकर भी प्राण को अपनी फिल्म के लिए अप्रोच नहीं कर पा रहे थे.प्राण को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने राज कपूर की बॉबी में काम करने के लिए हां कह दिया और पारिश्रिमक के तौर पर महज एक रु पया शगुन के तौर पर लिया था. 

शिव का नाम लेने भर से ही मिल जाती है ऊर्जा : मोहित रैना


लोगों ने शिव को नहीं देखा. लेकिन इन दिनों वे इन्हें ही भगवान शिव मानते हैं. वर्षों बाद टेलीविजन पर प्रसारित हो रहे किसी धार्मिक शो को इस कदर लोकप्रियता मिली कि लोगों ने उन्हें शिव मानना शुरू कर दिया. बात हो रही है मोहित रैना की. मोहित खुद भी भगवान शिव के भक्त है. शिव से किस तरह से मिलती है ऊर्जा और कैसे निभाते हैं वे यह किरदार बता रहे हैं खुद मोहित रैना

शिव, साधना और अध्यात्म का गहरा संबंध है. आप इनसे कैसे तारतम्य बिठाते हैं. 
मैं अपने काम और अपनी व्यक्तिगत जिंदगी में सामांजस्य बिठाना जानता हूं. जब मैं महादेव की शूटिंग कर रहा होता हूं तो मैं शो को 100 प्रतिशत देता हूं. मैं स्क्रीप्ट को बार बार पढ़ता हूं. मैं लगभग 15 मिनट का मेडिटेशन करता हूं. ताकि मैं अपना बेस्ट दे सकूं. यह जो मंै 15 मिनट का समय लेता हूं. इस 15 मिनट में मैं पूरी तरह से महादेव की दुनिया में चला जाता हूं और फिर पूरे ध्यान के साथ इस किरदार को निभाता हूं.

आप मॉडलिंग से हैं और आपका किरदार शिव का है. क्या इस भूमिका ने मॉडल मोहित रैना पर कुछ अच्छे प्रभाव छोड़े हैं?
हां, बहुत ज्यादा. मैं शिव भक्ति से बहुत ज्यादा प्रभावित रहा हूं. मैं जब महादेव की शूटिंग नहीं कर रहा था. उससे पहले से मैं शिव का भक्त रहा हूं. मैं शिव के बारे में न जाने कितनी किताबें पढ़ चुका हूं और मुझे अच्छी जानकारी है. इस बारे में. अब जबकि मैं उन पर आधारित शो की शूटिंग कर रहा हूं. तो मुझे उनकी जिंदगी के हर पहलुओं के बारे में पूरी जानकारी हो गयी है.और अब इन्हें गहराई से समझने भी लगा हूं. मैं अपनी जिंदगी में भले ही कोई भी किरदार निभा लूं. लेकिन शिव को मैं अपनी जिंदगी से अलग नहीं कर पाऊंगा और खासतौर से इस किरदार को. यह मेरी जिंदगी का सबसे खास किरदार रहेगा.

इस किरदार को निभाने से बाद कुछ बदलाव महसूस करते हैं? क्या इससे पहले शिव को मानते थे?
जैसा कि मैंने पहले ही कहा हां मैं शिव का फॉलोअर रहा हूं. और उन्होंने मेरी जिंदगी को पहले भी काफी प्रभावित किया है और हमेशा करते रहेंगे. उनकी दृढ़ निर्णय लेने की सोच व कई बातें मुझे हमेशा प्रभावित करती हैं.
जिस तरह टीवी पर आप शिव के रूप में मानव जाति को उनके आदर्श, कर्तव्य का बोध कराते हैं. उसे परिवार में भी फॉलो करते हैं?
हां, मैं भी फॉलो करता हूं और मेरा परिवार भी फॉलो करता है. मैं और मेरी मां कोशिश करते हैं कि जब भी मैं घर पर हूं साथ खाऊं. यह शिव का ही आदर्श है कि परिवार साथ साथ साथ रहे. साथ साथ खाये. शिव मां की महिमा को महत्व देते थे. मैं भी देता हूं. मैं कोशिश करता हूं कि मैं ज्यादा से ज्यादा समय मां के साथ बिताऊं. मातृत्व धर्म निभाने की कोशिश करता हूं.
क्या आपको ऐसा लगता है कि शिव ही शक्ति है, जो मनुष्य के जीवन को बदल सकता है?
मैं किसी को बदलने वाला कोई नहीं होता है. हां, मगर मुझे जान कर खुशी होती है कि लोग मुझे शिव मान कर खुद को बदलने की कोशिश करते हैं. हालांकि मैं सिर्फ किरदार प्ले कर रहा हूं. और मेरी यही कोशिश होती है कि शिव के रूप और प्रारूप को मैं सही तरीके से चरित्रार्थ कर सकूंू. लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि मोहित रैना सिर्फ सिर्फ किरदार प्ले कर रहा है.  मैं किसी को हर्ट करने की कोश्श् िनहीं करना चाहता.

दर्शकों में आपकी अलग छवि बन चुकी है. तो रियल लाइफ में कैसे इसे लेकर सामांजस्य बिठाते हैं?
मैं एक अभिनेता की तरह ही पेश आता हूं. आम जिंदगी में मुझे भी वह सब कुछ पसंद है. जो आमलोगों को पसंद है. मैं जब शूटिंग नहीं करता तो मैं अकेले रहना पसंद करता हूं. मैं पार्टी करना पसंद नहीं करता. मैं अपनी मां के साथ वक्त बिताना पसंद करता हूं. एसा कई बार हुआ है कि मैं जिम में रहता हूं और कई लोग आते हैं और मुझसे कहते हैं कि मैं उन्हें आशीर्वाद दे दूं. लेकिन उस वक्त मैं दुविधा में पड़ जाता हूं कि लोग ऐसा क्यों सोचने लगे हैं. चूंकि मैं किसी के सेंटीमेंट से खेलना नहीं चाहता हूं.

शक्ति और ऊर्जा के रूप में शिव को किस तरह परिभाषित करेंगे?
मैं मानता हूं कि भगवान शिव सुप्रीम गॉड की तरह है. वह जिंदगी को बैलेंस देने वाले भगवान हैं. मैं जब छोटा था. तब भी उन पर अटूट विश्वास करता था और अब भी अटूट विश्वास करता हूं. मैं जब मेडिटेशन करता हूं. उनके बारे में सोचता हूं. हर शॉट से पहले उनका ध्यान करता हूं. जब भी उनका नाम लेता हूं मुझे ऊर्जा, पॉवर, शक्ति मिलती है.जिसके माध्यम से मैं शिव का किरदार कर पा रहा हूं.
कभी शिव सामने आयें तो उनसे क्या मांगना चाहेंगे?
बस यही कि वह मेरी मां को खुश रखें और मैं जिस तरह काम कर रहा हूं और जितनी मेहनत कर रहा हूं. उसका फल मुझे मिले. और जो दिया उसके लिए धन्यवाद कहना चाहूंगा.

्न मुझे साक्षात शिव के दर्शन हुए हैं : रवि किशन


उनके रग रग में शिव हैं. वे शिव के भक्त नहीं, बल्कि शिव को गुरु और खुद को उनका शिष्य मानते हैं. उन्हें जिंदगी में ऊर्जा हर हर महादेव के नारे से मिलती हैं. बात हो रही है बेहतरीन अभिनेता रवि किशन की. उनकी जिंदगी में क्यों हैं शिव की भूमिका अतुल्नीय. 

शिव की तरह मैं भी दिल का साफ हूं. लेकिन एक बार जो गुस्सा आ जाये तो तांडव मच जाता है. 
रवि किशन शिव को हमेशा अपना अराध्य, गुरु बताते रहे हैं. ऐसा कब से और इसके पीछे की वजह?
शिवभक्ति मुझे विरासत में मिली है. मेरे पिताजी पंडित श्याम नारायण शुक्ल एक पुजारी थे. बचपन से उन्हें मैंने शिव भक्ति में लीन पाया. मेरी माताजी भी अपने दिन की शुरुआत पूजा पाठ से करती थी. यही वजह है कि मुझे भी भोलेनाथ के प्रति श्रद्धा जगी और आज मैं दुनिया के किसी कोने में भी रहूं बिना शिव को स्मरण किये दिन की शुरुआत नहीं करता.
- आपकी जिंदगी में शिव का क्या महत्व है?
मेरी जिंदगी में शिव का वही स्थान है. जो मेरे माता पिता का है. मैं शिव से अलग खुद को देख ही नहीं सकता. मेरे लिए शिव सत्य हैं और मैं उनकी महिमा को सबसे सत्य मानता हूं और मानता हूं कि शिव की महिमा न होती तो शायद मैं आज यहां तक कभी नहीं पहुंचता.
- कोई ऐसी घटना या बात, जिसने शिव भक्ति की ओर प्रेरित किया?
शिवभक्ति तो बचपन से कर रहा हूं. चूंकि शिव ने कई बार मुझे जीवन में सच्चाई का रास्ता दिखाया है. तीन साल पहले बनारस में इसक की शूटिंग कर रहा था. मुझे जीप चला कर सामने से एक ट्रक को रोकना था. दृश्य के अनुसार ट्रक को दस मीटर की दूरी पर रुकना था. लेकिन ऐन मौके पर ड्राइवर का पैर ब्रेक पर नहीं लगा. मेरे पास मात्र कुछ सेकेंड का वक्त था. ट्रक सीधे जीप से टकराने के बाद रुकी. अगर मैं जीप में होता शायद आपसे बात नहीं कर रहा होता. मैंने जंप कैसा लगाया. मुझे खुद पता नहीं. एक अदृश्य शक्ति ने मुझे बचाया. जो की यकीनन भोलेनाथ ही थे उन्होंने मुझे बाहर खींच लिया. इस तरह की कई घटनाएं जिंदगी में होती रही हैं और यही वजह है कि मैं शिव की आराधना में लीन रहना चाहता हूं और बेहद खुश रहता हूं.
- आपकी ऊर्जा और जिंदादिली से शिव का कोई संबंध? 
भगवान शिव औघड़ दानी हैं. वो दुनिया में ऊर्जा के स्रोत हैं और जिनके पास ऊर्जा का भंडार होगा. उनसे बड़ा जिंदादिल कौन हो सकता है. और मेरा तो डायरेक्ट कनेक् शन भगवान शिव से हैं क्योंकि उनकी तरह मैं भी औघड़ हूं. दिल में कुछ नहीं हैं, जो हैं जुबान पर है. वही दिल में हैं. मेरा मानना है कि जिस इंसान का दिल साफ होता है. उससे ज्यादा ऊर्जावान और जिंदादिल कोई नहीं.
- अपने व्यक्तित्व को किस तरह परिभाषित करेंगे?
मैं खुद को एक सरल और सीधा इंसान मानता हूं. जो दूसरों के दुख से दुखी होता है और दूसरों के सुख से सुकून महसूस करता है. किसी की सफलता से जलता नहीं है बल्कि प्रेरणा लेता है. जो सबको साथ लेकर आगे बढ़ना चाहता है, पर जिन्हें तन्हाई भी पसंद है. ठीक उसी तरह जिस तरह भोले बाबा हिमालय पर विराजते थे. गुस्सा तब तक नहीं आता. जब तक कुछ बहुत बुरा ना हुआ हो और एक बार जो गुस्सा आया गया तो तांडव मच जाता है.
- आप रूद्राक्ष धारण करते हैं, इससे क्या अनुभव होता है? आपकी नजर में इसका महत्व?
रुद्राक्ष सिर्फ एक पवित्र माला ही नहीं है, बल्कि उसका सीधा संबंध इंसान के दिल से होता है. रुद्राक्ष दिल को मजबूती देता है. रही बात मेरे जीवन में इसके महत्व की तो उसके बिना मैं खुद को अधूरा महसूस करता हूं. अर्थात मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है. श्ूटिंग के दौरान मेरे वैनिटी वैन में भी भगवान भोलेनाथ के साथ रुद्राक्ष आपको दिख जायेंगे.
- अकसर बम-बम भोले या ह्यजय शिव शंकर कह कर अपनी बात कहते हैं. इसके पीछे कोई राज? क्या कोई ऊर्जा मिलती है?
महादेव को हर हर करने से वातावरण से विनाशकारी शक्तियां कमजोर होती हैं. यह एक ऐसा उद्धोष है जिसके सुनने मात्र से ही राग राग में ऊर्जा और शक्ति का संचार होता है. जहां तक इसके पीछ ेछुपे राज की बात है तो आपको बता दूं कि बचपन से ही मुझे लगता था कि दुनिया में कुछ करने आया हूं. खुद को एक संन्यासी समझता था. यह बात साफ भी हो गयी है कि जब मैं राज पिछले जनम का है में अपने पिछले जीवन में गया तो खुद को बर्फीली पहाड़ी पर बिना कपड़ों के एक नागा साधू के रूप में पाया. दुनिया भले ही कहे कि भगवान एक अदृश्य शक्ति है. पर मुझे साक्षात दर्शन हुए हैं शिव के.साक्षात भगवान शिव को मैंने अपने समक्ष पाया था. उस समय मैंने इसका जिक्र अपने सहयोगी कलाकार मनोज बाजपेयी से भी किया था.
- असफलता से बाहर निकलने में शिव भक्ति ने किस तरह मदद की?
असफलता अगर सफलता की जननी है तो आपके आराध्य देव आपके मार्गदर्शक होते हैं, जो पल पल आपको सही दिशा की ओर बढ़ने की प्रेरणा देते हैं. मैं गर्व से कहता हूं कि भोलेनाथ ने मुझे संघर्ष के दिनों पर कभी हिम्मत हारने नहीं दिया और यही वजह है कि आज मैं खुद को अभिनय का भूखा पर सफल अभिनेता मानता हूं.
कभी शिव सामने आये तो क्या कहना चाहेंगे?
बस उन्हें तहे दिल से धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने मेरी सारी मनोकामना पूरी की.

ोग कहते फिरेंगे ओ तेरी : पुलकित - बिलाल


पुलकित ने अपनी पहली शुरुआत से ही साबित कर दिया था कि वे बेहतरीन अभिनेता हैं. िफल्म फुकरे में उनकी लीक से हट कर एक्टिंग को हर किसी ने पसंद किया. अब वह ओ तेरी से नये किरदार में दर्शकों के सामने होंगे. साथ ही उनके साथ फिल्म के एक नया चेहरा भी नजर आयेगा. मशहूर फिल्म मेकर कमाल अमरोही के पोते बिलाल अमरोही का यह पहला कदम है. 
बिलाल, सबसे पहले आपको बहुत बधाई. आपकी पहली शुरुआत है. आप नर्वस हैं?
हां, बहुत नर्वस हूं. नर्वसनेस की वजह यह भी है कि जब किसी फिल्मी परिवार से आपका ताल्लुक होता है तो लोग आपसे हद से ज्यादा अपेक्षाएं करने लगते हैं. मेरे दादाजी की फिल्में हिट रही हैं. उनमें वह धैर्य था कि उन्होंने पाकिजा जैसी फिल्मों को दोबारा से रिशूट करके बनाया था. ये सब बातें सुनता हूं तो लगता है कि क्या मैं उस लेवल का काम कर पाऊंगा या नहीं. मुझे खुशी है कि मुझे एक अच्छी फिल्म से मौका मिल रहा है.

पुलकित आपकी पिछली फिल्म काफी पसंद की गयी. तो क्या आपको लगता है कि फुकरे की वजह से अब आपके पास अच्छे और अलग तरह के आॅफर आने लगे हैं?
जी हां, बिल्कुल लोगों का नजरिया मेरे प्रति फिल्म फुकरे से बदला है. अब बड़े प्रोडक् शन हाउस का विश्वास मुझमें जगा है. शायद यह तब नहीं होता. जब मेरी फिल्में फ्लॉप होती. लेकिन फुकरे ने मुझे अच्छी पहचान दी है. फुकरे की वजह से ही मुझे अरबाज खान की फिल्म डॉली की डोली जैसी फिल्में करने का मौका मिल रहा है. मैं अपने काम से बेहद संतुष्ट हूं.

बिलाल और पुलकित आप दोनों बतायें. फिल्म ओ तेरी के बारे में?
बिलाल और पुलकित : ओ तेरी दो रिपोर्टरों की कहानी पर आधारित है. ये फिल्म करने के बाद हम महसूस कर पा रहे हैं कि किसी पत्रकार के काम में कितनी दिक्कतें आती होंगी. हमने इस फिल्म के लिए कई न्यूज चैनल के चक्कर लगाये हैं. लोगों को काम करते देखा है. तब हम यह समझ पाये हैं कि किस तरह से जर्नलिस्ट काम करते हैं. ओ तेरी की कहानी आज के युवाओं की है. आज के जेनरेशन की है. फिल्म में जॉब, जॉब हंटिंग और उसमें मीडिया की भूमिका को हास्य तरीके से दर्शाने की कोशिश की गयी है.

बिलाल और पुलकित इंडस्ट्री में ऐसी चर्चा है कि आप दोनों को ओ तेरी इसलिए मिली क्योंकि आप दोनों सलमान खान के करीबी हैं?
बिलाल : हां, मैं अपना पूरा श्रेय सलमान भाई को देना चाहूंगा. सलमान भाई मेरे परिवार के करीबी रहे हैं. हम हमेशा एक दूसरे के घर आते जाते हैं. हम दोनों का परिवार एक दूसरे से करीब है और उन्होंने मुझसे कहा कि मुझे इस फिल्म से शुरुआत करनी चाहिए. लेकिन इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि मैंने मेहनत नहीं की है. मैं बकायदा एक्टिंग की ट्रेनिंग ली. तब जाकर मैं शुरुआत करने जा रहा हूं.और मुझे लगता है कि जिस तरह की फिल्में अभी बन रही हैं. यह मुमकिन नहीं कि अगर किरदार आपसे मैच न करता हो तो कोई निर्माता सिर्फ आपकी लांचिंग के लिए फिल्म बनायेगा. हां, यह जरूर है कि फिटनेस को लेकर मैं सलमान भाई की नकल जरूर करता हूं
पुलकित : यह सही है कि सलमान भाई हमारे करीबी हैं और मैं उन्हें तहे दिल से बहुत प्यार करता हूं. लेकिन फिल्मों का चुनाव उसके किरदार की मांग पर होता है. उस किरदार में मैं फिट बैठता हूं. तभी वह मेरा चुनाव करेंगे. वरना उनके प्रोडक् शन की हर फिल्म में तो मैं ही होता. सो, मैं इस बात को नहीं स्वीकारता.

बिलाल और पुलकित नयी जेनरेशन को जितने मौके मिल रहे हैं. प्रतियोगिता उतनी ही टफ होती जा रही है. आप इसे किस तरह लेते हैं?
बिलाल : हां, यह सच है कि आज जितने मौके हैं. प्रतियोगिता भी उतनी ही है. लेकिन मुझे लगता है कि हर कलाकार एक दूसरे से अलग होता है और उसे वैसे मौके मिल ही जाते हैं. अगर खुद को प्रूव करना है तो लीक से हट कर करना होगा. लेकिन मेरी पहली फिल्म से यह तय होगा कि मैं किस तरह आगे बढूंगा. मैं जानता हूं कि आज फिल्मी बैकग्राउंड पर फिल्में नहीं मिलती. सो, मैं कोशिश करूंगा कि मेहनत करूं.
पुलकित : मैं कहना चाहूंगा कि हर किसी अपनी खासियत है. हरमिजाज की फिल्में बन रही हैं. भीड़ से अलग चेहरा बनाना है तो भीड़ के बीच में रह कर बनाना होगा. कोशिशें जारी हैं. और फिल्मी दुनिया में पासा कब पलटे पता नहीं चल सकता. सो, सबको मौके मिलेंगे. पू्रव तो बड़े बड़े कलाकार भी हर दिन करते रहते हैं तो इन बातों के लिए तो हम पूरी तरह से तैयार ही हैं. 

मैं और मेरे स्टार्स =4


अपनी पसंदीदा अभिनेत्री नरगिस फाकरी से पूछ रहे हैं बोकारो से सौरभ सिन्हा, नंदिनी श्रीवास्तव अपने पसंदीदा सवाल
 नरगिस आप फिल्में कम क्यों करती हैं?
चूंकि मैं हर तरह की फिल्में नहीं करना चाहतीं. मैं चाहती हूं कि कुछ ऐसी फिल्में करूं. जो मुझे पसंद आये. जिससे मैं नया कुछ सीख सकूं. जैसा कि मैं अभी फिल्म मैं तेरा हीरो कर रही हूं. इसमें मैं खुद भी बहुत हंसी हूं और लोगों को भी इसे देख कर मजा आया. ऐसी फिल्में आपको फ्रेश कर देती है और यही वजह है कि मुझे ये फिल्म काफी पसंद है.
आपने अब तक मद्रास कैफे, रॉकस्टार जैसी फिल्में करने के बाद कॉमेडी फिल्म क्यों चुनी?
क्योंकि मुझे कॉमेडी काफी टफ जॉनर भी लगा. लेकिन ऐसी फिल्म करने पर आपको मजा बहुत आता है. आप पॉजिटिव हो जाते हो. क्योंकि हर जगह आपको सिर्फ हंसना हंसाना होता है. लेकिन कॉमेडी टफ काम है. मुझे खुशी है कि मुझे डेविड धवन के साथ काम करने का मौका मिला है और वे कॉमेडी के स्टार रहे हैं. मैं कोशिश करूंगी कि आगे भी खुद को खुश करने के लिए ऐसी फिल्में करती रहूं.
आपका अब तक का सफर कैसा रहा बॉलीवुड में?
बहुत टफ चूंकि लगातार मेरी क्रिटिसिज्म होती रहती है और लगातार मैं मेहनत कर रही हूं. खास बात यह है कि अब मैंने हिंदी को बहुत हद तक इंप्रूव कर लिया है. अब मैं फिल्म की डबिंग खुद से कर रही हूं. जाहिर सी बात है. इससे मुझे बेहद खुशी है और मैं खुद पर गर्व महसूस करती हूं कि मैं ये सब कर पा रही हूं.
अगर आप एक्टिंग के क्षेत्र में न होती तो क्या करना पसंद करतीं? शुरू से सोच रखा था कि  एक्टिंग की फील्ड में ही आना है?
नहीं मैंने शुरू से नहीं सोचा था. मैं शायद फिल्मों में नहीं होती तो मैं नेचरोपैथी जैसी चीजों में होती. या फिर साइकॉलोजी से कुछ कर रही होती. हालांकि अब मुझे लगता है कि साइकोलॉजी विषय को समझने का सबसे अच्छा तरीका तो यह सिनेमा की दुनिया ही है. यहां इतने तरह के लोग और इतने मिजाज के लोग मिलते हैं कि आप इस दुनिया से ही लोगों की मनोस्थिति को सही तरीके से समझ सकते हो और सीख सकते हो.
आपको लगता है कि दो अभिनेत्रियां दोस्त बन सकती हैं?
मुझे लगता है कि दो लोग अच्छे दोस्त हो सकते. जब आप दोनों के विचार मिलें. इलियाना तो बहुत ही अच्छे स्वभाव की लड़की है और हम दोनों में खूब बातें होती रहती हैं. सो, मैं मानती हूं कि दो अभिनेत्रियां दोस्त जरूर हो सकती हैं.
आपकी आनेवाली फिल्में?
जल्द ही घोषणा करूंगी. मैं शौकीन तो नहीं कर रही हूं. यह तय है.
नोट : वर्ल्ड फिल्म और फिल्मी बातें पिछली बार का बचा हुआ होगा

रमन भल्ला सा नहीं मैं : करन पटेल


करन पटेल इन दिनों स्टार प्लस के धारावाहिक ये हैं मोहब्बते में रमन भल्ला का किरदार निभा रहे हैं. दर्शक उन्हें इस किरदार में बेहद पसंद कर रहे हैं. 

करन, आप शो में रमन भल्ला का किरदार निभा रहे हैं, जो ऊपर से सख्त हैं. लेकिन दिल से बेहद मासूम? वास्तविक जिंदगी में भी क्या आप ऐसे ही हैं?
नहीं दरअसल, वास्तविक जिंदगी में तो मैं अंदर और बाहर दोनों से ही सख्त नहीं हूं. फन लविंग हूं और हर चीज को एंजॉय करता हूं. रमन भल्ला की तरह तो मैं बिल्कुल नहीं हूं. मैं फन लविंग के साथ साथ अनप्रीडिक्टेबल हूं. रमन हर काम सुनिश्चित तरीके से करता है. लेकिन मैं ऐसा बिल्कुल नहीं हूं. सो, करन और रमन में कोई समानता नहीं है.
इस शो को इन दिनों काफी लोकप्रियता मिल रही है. आपको उम्मीद थी कि शो को इस कदर कामयाबी मिलेगी?
नहीं, मुझे नहीं लगा था. हां, मगर कांसेप्ट अलग था और यही वजह रही कि कई दिनों के बाद कुछ अलग देखने वाले दर्शकों को यह शो पसंद आया. मेरा पिछला शो कसम से और कस्तूरी में भी लोगों ने मुझे बेहद पसंद किया था. लेकिन रमन भल्ला के रूप में मुझे ज्यादा लोकप्रियता मिल रही है. अब जहां भी जाता हूं लोग मुझे रुही के पापा कहते हैं या रमन भल्ला कहते हैं.
आपकी  को स्टार द्वियंका त्रिपाठी के बारे में बतायें?
द्वियांका बेहतरीन अभिनेत्री होने के साथ साथ दिल की बेहद अच्छी हैं और शायद यही वजह है कि उन्हें यह शो आॅफर हुआ और वह इशिता का किरदार बखूबी निभा पा रही हैं. वह भी बेहद फन लविंग हैं और  सबसे खास बात वह इशिता की तरह ही बहुत केयरिंग भी हैं. मुझे लगता है कि इशिता का जैसा किरदार है हर लड़की को वैसा होना ही चाहिए. जो अपने माता पिता के साथ साथ हर किसी का ख्याल रखना जानती हैं साथ ही किसी पर भी यूं ही भरोसा नहीं करती. वह जानती है कि उसे क्या करना है क्या नहीं.
क्या वजह है कि लोगों को यह शो काफी पसंद आ रहा है?
शो का कांसेप्ट नया है. दो पड़ोसी हैं. दो एक दूसरे को पसंद नहीं करते. लेकिन सिर्फ एक बच्ची की वजह से दोनों परिवार एक होते हैं. इस शो के माध्यम से दो कल्चर की चीजें तो सामने आ ही रही हैं. दो कल्चर एक दूसरे में कैसे मिक्स होने की कोशिश करते हैं ये चीजें दिखाई जा रही हैं. साथ ही इन बातों से भी डील करते दिखाया जा रहा है कि एक बच्ची बिना मां के कैसे रह सकती. एक मां कैसे बच्ची को छोड़ कर किसी दूसरे आदमी के पास सिर्फ पैसों के लिए जा सकती. ऐसा नहीं है कि ये सब मनगढंÞत कहानियां हैं. हकीकत यही है कि हमारे आस पास की दुनिया में ऐसा होता है. ऐसे कई लोग हैं जो अपने बच्चों की परवाह नहीं करते. उन लोगों को सामने लाने का यह शो अच्छा जरिया है.
एक्टिंग के अलावा आपको किन किन चीजों में दिलचस्पी है?
मुझे गाने सुनना, किताब पढ़ना अच्छा लगता है. आज कल मैं मंजू कपूर की किताब कस्टडी पढ़ रहा हूं. मुझे कल हो न हो का टाइटिल ट्रेक बार बार सुनना बेहद अच्छा लगता है. मुझे फिल्में देखने पसंद है. सोशल नेटवर्किंग करना भी अच्छा लगता है. चूंकि इसके माध्यम से हमें एक साथ काफी जानकारी मिलती है और काफी लोगों से आप कनेक्ट हो जाते हैं.
करन आप खुद गुजराती हैं और किरदार पंजाबी का निभा रहे हैं तो क्या क्या समानता और विभिन्नता दिखती है दोनों कल्चर में?
दरअसल, विभिन्न होते हुए भी दोनों एक से हैं. दोनों ही लोग खाने के शौकीन हैं और मौज मस्ती के भी. सभ्यता में कई समानता हैं. दोनों कल्चर को लेकर काफी सजग हैं. कहीं भी जायें वे अपने कल्चर को नहीं छोड़ते. बिजनेस का दिमाग पंजाबी और गुजराती दोनों ही के पास होता है. और जबरदस्त होता है.
अगर बॉलीवुड में कभी आॅफर मिले तो?
तो जरूर करूंगा. मेरी इच्छा है कि मैं काजोल और शाहरुख की फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे जैसा कुछ किरदार निभाऊं.

मुझे टीआरपी नहीं फैन्स चाहिए : आशीष


कांदिवली ईस्ट के गार्डेन इस्टेट में सिंघानिया चॉल स्थित है और वही मौजूद है राघव सिंघानिया का आॅफिस भी. राघव के दोस्त पार्टी की तैयारियों में जुटे हैं. राघव फटाफट अपने शॉट्स निबटा रहे हैं. चूंकि उन्हें हेयर कर्ट के लिए जाना है...बात हो रही है आशीष चौधरी की, जो इन दिनों छोटे परदे पर राघव सिंघानियां के रूप में बेहद पसंद किये जा रहे हैं. 

आशीष, इस शो से आपको लगातार लोकप्रियता मिल रही है. आपको उम्मीद थी कि लोग इस तरह आपको प्यार देंगे?
यह तो जानकारी थी कि छोटे परदे की जो पहुंच है. वह फिल्मों से ज्यादा है. चूंकि विदेशों में लोगों को मेरा शो  हम परदेसी हो गये ही याद है. उसके बाद मुझे कई मेरे फैन्स ने मेल भेजना शुरू कर दिया था कि तुम गायब कहां हो गये. सोचिए उसके बाद मैंने कितनी फिल्में की.  लेकिन लोगों को मेरा टेलीविजन का शो याद था. लेकिन एक मुट्ठी आसमान देखने के बाद मुझे काफी मेल्स आते हैं और इससे पता चलता है कि विदेशों में फिल्मों से ज्यादा टीवी देखते हैं लोग़.साउथ अफ्रीका और न जाने कहां कहां से मेल आते हैं. फैन्स कॉल्स आते हैं. तो लगता है कि कुछ अच्छे काम कर रहा हूं. हालांकि लोग टीआरपी की बात करते हैं. लेकिन मेरा मानना है कि ऐसे जगहों पर जहां टीआरपी नहीं है. वहां भी यह शो काफी पॉपुलर हैं. हाल ही में बिहार के मुंगेर से एक दांपत्य मुझसे मिलने आये थे. उनके चेहरे पर एक खुशी थी. उन्होंने शो की काफी तारीफ की और बताया कि  किस तरह बिहार के मुंगेर इलाके में यह शो पॉपुलर है. सभी देखते हैं. जबकि टाइम स्लॉट 7 बजे का है. फिर भी. तो बिहार में तो टीआरपी नहीं है. फिर भी लोग देखते हैं और पसंद कर रहे हैं.

इस शो को हां कहने की वजह क्या रही? अचानक फिल्मों से टीवी में आने का निर्णय लेना कठिन तो रहा होगा?
हां, मगर दीया और टोनी मेरे अच्छे दोस्त हैं. प्लस इस शो के साथ एक अच्छा मेसेज जुड़ा है. मैंने जब यह मेसेज लोगों में स्प्रेड करना शुरू किया कि मैं अब टीवी में काम करना चाहता हूं. चूंकि बॉलीवुड में एक से रोल कर रहा था. मैं संतुष्ट नहीं था. मेरे पास लगातार आॅफर आ रहे थे. साथ ही बॉलीवुड में बने रहने के लिए आपको हिट फिल्मों की जरूरत होती है. जैसे जैसे फिल्में कम होती हैं. आपका फोन भी रिंग होना बंद हो जाता है. इससे बिल्कुल प्रभाव पड़ता है. मेरी लास्ट फिल्म तो हिट फिल्म थी डबल धमाल . लेकिन फिल्म की जब आधी शूटिंग ही पूरी हुई थी तो मेरे घर पर ट्रेजेडी हुई ( बहन बहनोई का ताज होटल में हुए आतंकवादी हमले में मौत) उसके बाद डैडी का बिजनेस डूबा. हमलोग बैंक रप्ट हो गये थे. मुझे मेरे पिताजी के बिजनेस को मुझे रिवाइव करना था. ताकि मैं सबकुछ ठीक कर सकूं. सो, मैंने यह निर्णय लिया. मेरी जो जिम्मेदारियां थी. मुझे सब पूरी करनी थी. मैं टेंशन में था तो मैंने फिल्में कर बंद कर दिया था.रियलिटी शोज के भी आॅफर आ रहे थे. लेकिन मैं डांस तो जानता नहीं उतना. बिग बॉस जैसे शो को भी मंैने पांच बार मना किया. तो फिर उन्होंने मुझसे पूछना शुरू कर दिया. मैं चाहता था कि कोई ऐसा शो करूं जिसमें कुछ मेसेज भी हो.  मेरा बेटा भी यह शो देखता है तो अच्छा लगता है कि ऐसे किसी शो के साथ जुड़ा जो अच्छे मेसेज के साथ लोगों के सामने आ रहा है. मेरा बेटे अभी सिर्फ चार साल का है. लेकिन वह शो देखता है तो यह समझता है कि किस तरह चॉल टूटने वाला है. इस शो में जैसा दिखाते हैं कि घर में जो काम कर रहा है उसकी भी रिस्पेक्ट करो तो वह शो से काफी अच्छी चीजें सीख रहा है.

अभिनय के अलावा किन चीजों में रुचि है?
मैं इन दिनों एडरवटाइजिंग बिजनेस से जुड़ा हूं. साथ ही सेक्योरिटी बिजनेस भी कर रहा हूं. साथ ही साथ मैं चाहता था कि अभिनय का जो शौक है और जो हूनर है. उसे मुझे खोने नहीं देना है. इसलिए मैंने काम करना जारी रखा है.

बॉलीवुड से किस तरह की प्रतिक्रिया मिली आपको?
मुझे लगा था कि सब कहेंगे कि फ्लॉप हो गया है. इसलिए टेलीविजन कर रहा है. लेकिन इंद्र कुमार ने मुझे बुला कर कहा कि आशीष मुझे पता ही नहीं था कि तुम ह्मुमर से अच्छा भी कुछ कर सकते हो. राघव के किरदार में तो तुम बहुत अच्छे जंच रहे हो. मैं तुम्हें इस तरह के किरदार वाली फिल्म जरूर दूंगा. मुझे इंद्र कुमार से यह कमेंट सुन कर बेहद अच्छा लगा. वैसे उनके साथ मैं टोटल धमाल कर रहा हूं. पूरी तरह से फिल्में करना बंद नहीं किया है, लेकिन अभी पूरा ध्यान इस शो पर है.

कोई मेरी देखभाल करे इसलिए नहीं करूंगी शादी : सोनम


भाग मिल्खा भाग और रांझणा के बाद अब सोनम कपूर थोड़ी बेवकूफियां करने की तैयारी में जुटी हैं. 

सोनम, आपको नहीं लगता कि रांझणा और भाग मिल्खा भाग जैसी फिल्में करने के बाद बेवकूफियां जैसी फिल्में करना बेवकूफी ही है?
नहीं, मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगता क्योंकि मैं किसी इमेज में बंधना नहीं चाहती.अभिनय का मतलब केवल सीरियस रोल करना ही नहीं है. मुझे हल्के फुल्के फिल्म करने में भी मजा आता है. बेवकूफियां में लव स्टोरी हैं और मुझे लव स्टोरीज करने में मजा आता है.

यशराज के साथ यह आपकी पहली फिल्म है. बॉलीवुड की हर अभिनेत्री चाहती हैं कि वह इस बैनर के साथ काम करें. इस बारे में आपकी क्या सोच है?
मैं आदित्य चोपड़ा की किसी फिल्म में जरूर काम करना चाहूंगी, जिसे वह निर्देशित करें. वरना, एज अ प्रोडक् शन हाउस ऐसा कुछ सपना नहीं था. मैं इतना सोचती नहीं हूं. जब आप  किसी प्रोडक् शन के साथ काम कर रहे होते हैं और उन्हें काफी सालों से जानते हैं. मेरे पापा ने इस प्रोडक् शन हाउस में काफी फिल्में की हैं तो आपको कुछ अनोखा नहीं लगता.मुझे अच्छे फिल्म मेकर के साथ काम करना है.

बेवकूफियां की क्या बातें आपको अच्छी लगी जिसने आपको हां कहने के लिए राजी किया?
मेरे पास दो साल पहले यह स्क्रिप्ट आयी थी. उस वक्त रिसेशन का दौर था. कंपनियां बंद हो रही थी.लोग जॉब से निकाले जा रहे थे. तो बहुत सारी ऐसी चीजें हो रही थी. मेरे कई दोस्त इस रिसेशन के भुक्तभोगी थे. उस वक्त मुझे यह स्क्रिप्ट मिली.तो मुझे लगा कि ऐसी कहानी कहना चाहिए. हबीब फैजल जो कि फिल्म के लेखक हैं, उनकी फिल्म में रियल लाइफ का काफी रिफ्लेक् शन होता है. जो कम्युनल राइट्स होते हैं स्मॉल टाउन में या कुछ ऐसे विषय आप देखें इशकजादे या फिर दो दूनी चार. सबसे रियलिटी है तो इस फिल्म में भी उन्होंने वही देने की कोशिश की है और जो मुझे काफी अच्छी लगी. ये जो फिल्म है, एक मीडिल क्लास परिवार की फिल्म है.

फिल्म के बारे में थोड़ा विस्तार से बताएं?
फिल्म एक लव स्टोरी है. दो आम लोगों की कहानी है. लेकिन ये एक ऐसी लव स्टोरी है. जो रिसेशन की वजह से पनपती है.जब ब्वॉयफ्रेंड की जॉब चली जाती है और फादर रिटायर्ड हो जाते हैं तो वह लड़की क्या करती है. क्या पैसे नहीं है. तब भी दोनों में प्यार बरकरार रहता है या नहीं. तो मुझे कहानी का यह एंगल बहुत पसंद आया था. यह बहुत रिलेटेबल है. आजकल लड़कियां ज्यादा मेहनती है. वर्किंग हैं. अपने ब्वॉयफ्रेंड से.तो मुझे अच्छी लगी. और फिल्म में काफी फन सीन था. मुझे लगा कि रांझणा के बाद कोई फन फिल्म करनी चाहिए थोड़ा चेंज तो होना ही चाहिए.
आपको लगता है कि पैसे जिंदगी में बहुत अहम होते हैं और प्रेम से बढ़ कर पैसा हो जाता है?
मेरी मम्मी हमेशा कहती है कि आपके पास जब ज्यादा पैसे होते हैं तो पैसों के बारे में नहीं सोचते. लेकिन जब नहीं होंगे तब आप इसके बारे में सोचेंगे. तो मां की बात सही तो लगती है. लेकिन थैंक गॉड ऐसी नौबत नहीं आयी है. हां, यह सच है कि कई बार लोग प्रेम से बढ़ कर पैसे को आंकने लगते हैं और पैसा प्रेम से ऊपर हो जाता है.
लेकिन कई बार लोग शादी का आधार पैसे पर ही मान लेते हंैं. लड़के लड़की में प्यार है तो कुछ नहीं, अगर लड़का कुछ न करे तो वह लड़की के लिए सही नहीं. ऐसा मान बैठते हैं. इस बारे में आपकी क्या राय है?
मेरा मानना है कि शादी लड़के की पढ़ाई और उसका लड़की के लिए प्रेम देख कर करना चाहिए. ये नहीं कि वह लड़का मेरी बेटी को पाल पायेगा या नहीं. अरे लड़की खुद कमाये. खुद नौकरी करे. अगर लड़का अच्छा है और उससे तुम प्यार करती हो तो करो न शादी. इसलिए नहीं कि उसके पास पैसे हैं कि नहीं. पेरेंट्स को भी ऐसा सोचना नहीं चाहिए.अगर मैं किसी से इसलिए शादी नहीं करूंगी कि वह मेरी देखभाल करे. मैं उसी से शादी करूंगी जिसके साथ मुझे अपना जीवन बिताना है. न कि जो मेरा ध्यान रखनेवाला हो. शादी को लेकर यह लोगों की गलत सोच है. मेरा मानना है कि पति पत् नी दोनों को काम करना चाहिए. और भारत में जहां काम की बहुत अपोरच्युनिटी है. वहां दोनों को काम करना चाहिए. आप घर पर भी काम कर सकते हैं. यह हमारा कल्चर होना चाहिए कि सभी काम कर लें.

आपने फिल्म में बिकनी पहनी है और इस बात को लेकर काफी चर्चा है?
यह सब बेफिजूल के चर्चे होते हैं. मैं इन पर ध्यान नहीं देती. फिल्म की स्क्रिप्ट में यह जरूरत थी कि ऐसा दिखाया जा रहा है कि मैं बिकनी पहना है. लेकिन मेरा फिगर बिकनी वाला नहीं है. सो, यह हिस्सा था फिल्म का. इसमें चर्चा बनने जैसी कोई बात नहीं थी.

दिल्ली के किरदार आपको लगातार मिलते रहते हैं. इसकी कोई खास वजह?
मैं शायद नॉर्थ इंडियन जैसी दिखती भी हूं. वहां की जिंदगी से वाकिफ हूं और वहां के लोगों की तरह मुझे पढ़ना बहुत पसंद है तो मुझे ऐसे किरदार मिलते रहते हैं. मैं किताबें बहुत पढ़ती हूं. आजकल मैं देवदत पटनायक की किताबें बहुत पढ़ती हूं. जैसे सीता और उनकी कई माइथोलोजिकल किताबें पढ़ना मुझे अच्छा लगता है.
आपकी आनेवाली फिल्में
खूबसूरत की रीमेक फिल्म कर रही हूं. मजा आ रहा है. 

मैं और मेरे स्टार्स -4


अपने पसंदीदा अभिनेता आयुष्मान खुराना से उनके फैन राहुल नंदा पूछ रहे हैं उनके पसंदीदा सवाल
आपको अगर फिर से टीवी पर मौका मिले तो क्या आप दोबारा काम करना चाहेंगे?
टीवी पर मैंने पहले भी कोई डेली सोप नहीं किया था. अब भी नहीं करना चाहूंदा. हां, कभी कोई और अच्छे आॅफर आये तो क्यों नहीं करूंगा.
आपके लगता है कि आपने जो सपने देखे थे, वह पूरे हो गये. आप अपनी कामयाबी से संतुष्ट हैं?
हां, मुझे लगता है कि जब यहां आया था मेरे पास किसी का सहारा नहीं था. मैंने अपनी जर्नी अकेले ही शुरू की थी. ऐसे में जब मैंने कामयाब हूं. परिवार साथ है. मेरी पत् नी साथ है. और साथ ही मुंबई में मेरा अपना घर है. तो यह सब सोच कर लगता है कि सुकून भरी जिंदगी जी रहा हूं.
यशराज के साथ काम करने का आपको पहला मौका मिल रहा है. कैसा रहा फिल्म बेवकूफियां का अनुभव?
मुझे खुशी है कि मुझे अच्छे अच्छे बैनर मिल रहे हैं. यशराज के साथ काम करने का हर किसी का सपना होता है. साथ ही फिल्म में ऋषि कपूर जी के साथ काम करने का मौका मिल रहा है. हम दोनों ही पंजाबी हैं और ऋषि जी मेरे पसंदीदा अभिनेता भी हैं. सो, मुझे बेहद मजा आया. जिन्हें कभी टीवी पर देखता था. उन्हें सामने देख रहा हूं.
गाने का शौक आपको कैसे हुआ?
हमेशा कॉलेज में पार्टिसिपेट किया करता था. वही से मुझे इसका शौक हुआ. मैं कविताएं लिखता रहता था. पानी दा रंग देख के...मैंने कॉलेज में ही लिखा था, जो अब काम आया

कंफर्ट जोन से बाहर निकलते सितारें


 विद्या बालन इंटेस और गंभीर अभिनेत्री मानी जाती हैं. लेकिन उनकी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म शादी के साइड इफेक्ट्स को देख कर यह बात स्पष्ट हो रहंी है कि वह अपनी बनी बनाई छवि को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं. जूही पहली बार नकारात्मक किरदार निभा रही हैं तो आलिया भट्ट ने अपने कंफर्ट जोन से बाहर आकर हाइवे की. आमिर खान ने धूम 3 की. दरअसल, इन दिनों कलाकारों की यह चाहत है कि वे अपनी बनी बनाई छवि से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं.
आमिर खान की धूम
आमिर खान जानते थे कि वे जिस तरह की फिल्में करते आये हैं. धूम 3 उससे जुदा फिल्म हैं. उन्हें न सिर्फ अत्यधिक शारीरिक मेहनत करनी पड़ेगी. बल्कि उन्हें खुद को मानसिक रूप से भी तैयार करना होगा. आमिर खान की शारीरिक बनावट ऐसी है, जिसमें उन्हें बाइक चलाने में परेशानी होगी. सर्कस के मूव्स दिखाने में तकलीफ होगी. लेकिन फिल्म गजनी के बाद आमिर खान ने धूम 3 का चुनाव किया. वे शांत स्वभाव की फिल्मों से जुदा धूम 3 में आक्रमक, बाइक से कई तरह के स्टंट करते नजर आयें. इससे स्पष्ट है कि आमिर खान जैसे सुपरस्टार को भी यह चाहत होती है कि वे एक से किरदार न निभायें. ताकि एकरूपता उनकी जिंदगी पर हावी न हो.
विद्या बालन की घनचक्कर और शादी के साइड इफेक्ट्स
विद्या बालन अपनी हाल ही में रिलीज फिल्म शादी के साइड इफेक्ट्स में थोड़ी असहज नजर आयी हैं. चूंकि आमतौर पर वे जैसी फिल्में करती हैं. वह उन पर आधारित होती है. अऔर उनमें गंभीरता होती है. लेकिन वह लगातार दो फिल्मों में अपना अलग रूप दिखाने की कोशिश कर रही हैं. दर्शकों को उनका यह रूप हजम नहीं हो रहा. लेकिन विद्या साफ शब्दों में कहती हैं कि वह कलाकार हैं और उन्हें हर तरह के किरदार निभाने हैं. उन्होंने बॉबी जासूस में हास्य किरदार निभाया है.
सुशांत सिंह राजपूत
सुशांत सिंह जल्द ही दिबाकर बनर्जी की फिल्म ब्योमकेश बक् शी में एक ऐसे लुक में नजर आयेंगे. जो उन्होंने इससे पहले नहीं किया, सुशांत की दो फिल्मों से साफ हो चुका है कि वे किस तरह के अभिनेता हैं. लेकिन यह फिल्म उनकी इमेज एक बार फिर से बदल देगी.
माधुरी का स्टंट
माधुरी ने फिल्म गुलाब गैंग में कई तरह के स्टंट किये हैं और उन्होंने सारे स्टंट खुद किये हैं. वे नहीं चाहतीं कि लोग उन्हें यह कहे कि उन्होंने बॉडी डबल का इस्तेमाल किया है. साथ ही फिल्म में उन्होंने गाना भी गाया है. माधुरी की लालसा है कि लोग उन्हें प्रतिभाशाली डांसर के साथ साथ एक स्टंट करतीं अभिनेत्री के रूप में भी जानें. उन्होंने गुलाब गैंग में सबको हैरत में डाल दिया है.
जूही का नेगेटिव किरदार
जूही चावला ने जब पहली बार गुलाब गैंग की कहानी सुनी थी तो उन्होंने फिल्म करने से इ्यकार कर दिया था कि लोग उन्हें नेगेटिव किरदार में नहीं स्वीकारेंगे. लेकिन अब जब उन्होंने यह फिल्म स्वीकार ली है तो उन्हें पूरा विश्वास हो गया है कि वह इस तरह के चैलेंजिंग किरदार भी निभा सकती हैं और अपने निर्णय से वे बेहद खुश हैं. चूंकि फिल्म के प्रोमो को देख कर उनके किरदार की काफी तारीफ हो रही है.
आलिया भट्ट
आलिया भट्ट ने पहली फिल्म में पैंपरड और हाइ सोसाइटी में काम करनेवाली लड़की का किरदार निभाया था. लेकिन फिल्म हाइवे में उन्होंने अपने कंफर्ट जोन से निकल कर कई परेशानियों के बावजूद रियलिस्टिक किरदार निभाया है और वह भी अपने निर्णय से बेहद खुश हैं.
सलमान खान
सलमान खान ने तय किया है कि अब वह फिर से अपनी रोमांटिक किरदार में वापसी करेंगे. कई एक् शन फिल्में करने के बाद उन्होंने प्रेम का रास्ता चुना है और जल्द ही उनकी फिल्म सूरज बड़जात्या के साथ आनेवाली है जिसमें वह रोमांटिक हीरो के किरदार में नजर आयेंगे.
कट्रीना कैफ
कट्रीना यह सुन कर थक चुकी हैं कि वह हिंदी फिल्मों की बार्बी डॉल हैं, सो उन्होंने तय किया है कि अब वह अपनी आगामी फिल्म जग्गा जासूस में जो किरदार निभाने जा रही हैं. उसमें वह जैसा किरदार निभा रही हैं. उसमें सिर्फ नाच गाना नहीं होगा.
 निर्देशक -निर्माता भी हैं बेचैन
दरअसल, इन दिनों कई निर्देशक भी अपनी इमेज बदलने की कोशिश कर रहे हैं. इसमें सबसे पहला नाम करन जौहर का आता है. उन्होंने गोरी तेरे प्यार में के निर्माता बन कर यह साबित किया कि अब वह भी गांव में फिल्में बनाना चाहते हैं. अनुराग बतौर निर्माता डार्क फिल्में नहीं, बल्कि मनोरंजक फिल्में परोसने की कोशिश कर रहे हैं. दिबाकर बनर्जी की फिल्म ब्योमकेश बक् शी कर्मशियल रूप से भी अलग तरह की फिल्म है. संजय लीला भंसाली भी बतौर निर्माता राउडी राठौड़ और गब्बर जैसी फिल्में बना रहे हैं. यशराज जहां मनोरंजक फिल्में बनाता है. अब वह पानी और ब्योमकेश बक् शी जैसी इंटेंस फिल्मों का भी चुनाव कर रही हैं. दीया मिर्जा बॉबी जासूस जैसी फिल्में कर रही हैं.
 सफल और असफल रहे हैं कलाकार
अपनी इमेज बदलने की कोशिश में अब तक गोविंदा जो कि हास्य अभिनेता माने जाते हैं और उन्होंने जब भी नेगेटिव किरदार निभाने की कोशिश की है. वह नाकामयाब रहे हैं. सनी देओल ने कई बार हास्य फिल्मों में खुद को साबित करने की कोशिश की. लेकिन आज भी उनका एंग्रीमैन होना ही उनकी पहचान बन चुका है. सैफ अली खान की चाहत है कि वह एक् शन हीरो बने. इसके लिए उन्होंने एजेंट विनोद की और साथ ही बुलेट राजा भी की. लेकिन वह सफल नहीं हो पाये. करीना कपूर ने हीरोइन फिल्म से खुद को इंटेस अभिनेत्री के रूप में स्थापित करने की कोशिश की. लेकिन कामयाब नहीं हो पाये.

दशरथ मांझी सा हूं मैं : आमिर खान


 आमिर खान एक बार फिर सत्यमेव जयते लेकर छोटे परदे पर वापसी कर रहे हैं. इस बार भी वे कई मुद्दों को अपने शो के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचायेंगे.

 सत्यमेव जयते के इस सीजन में इस बार सिर्फ पांच मुद्दे ही चुनने की वजह?
नहीं ऐसा नहीं है कि हम सिर्फ पांच मुद्दों के साथ आ रहे हैं. दरअसल, हम टुकड़ों में इस बार यह शो कर रहे हैं. हम तीन टुकड़ों में इसे करेंगे. हमें लगता है कि इस शो के मुद्दे बहुत भारी हैं. और उसमें हम इतनी चीजें दिखाते हैं तो हम चाहते हैं कि लोग उसे डाइजेस्ट करे.उसे ठीक से समझें और हम वह वक्त देना चाहते हैं. हम चाहते हैं कि लोग जो हमारा एपिसोड देखें तो उसे ठीक से फील करें. इसके अलावा जमीनी स्तर पर हम चाहते हैं कि उसमें कुछ इंप्रूवमेंट हो. हमलोग भी इसमें मदद करें. तो इन चीजों के लिए वक्त चाहिए.
दशरथ मांझी की कहानी से इस शो की शुरुआत करने की कोई खास वजह?
हां, आपको याद होगा, हमने पिछले सीजन में सिर्फ दशरथ मांझी जी के बारे में जिक्र किया था. लेकिन मैंने जब उनके बारे में पूरी जानकारी हासिल की और उन्हें जाना तो मैं उनसे बहुत प्रभावित हुआ. आप सोचिए लोग उन्हें पागल कहते थे कि कोई कैसे पहाड़ पर रास्ता बना देगा. लेकिन उन्होंने लोगों की फिक्र नहीं की. मैं भी ऐसा ही जुनूनी आदमी हूं. मुझे भी हर कोई कहता रहता है अरे ये तो पागल है. देखो क्या कर रहा है. देखो लगान बना रहा है. देखो सत्यमेव जयते जैसा शो बना रहा है. लेकिन मैं भी किसी की नहीं सुनता तो मुझे लगता है कि मैं दशरथ मांझी जैसा ही हूं और उनका यही व्यक्तित्व मुझे बहुत ज्यादा प्रभावित करता है. यही वजह है कि हमने उनकी कहानी को चुनने का निर्णय लिया. दूसरी वजह यह थी कि सत्यमेव जयते के पहले सीजन से हमें किसी कड़ी को जोड़ना था. तो हमने यही तरीका अपनाया. मैं दशरथ मांझी के गांव गया था. वहां लगभग 35000 लोग एकत्रित हुए थे और मैंने जब गांव देखा तो मुझे लगा कि दशरथ मांझी ने कितनी परेशानियों से जूझते हुए यह सब पूरा किया होगा. वहां के लोग कितने मासूम हैं और वे कितने शौक से मुझे देखने आये हैं. मुझसे कितनी उम्मीदें हैं तो मैंने तो तय भी किया है कि हम अपनी तरफ से और सत्यमेव जयते के माध्यम से जो भी कर सकेंगे हम उनके परिवार और गांव को सहयोग जरूर करेंगे.
कभी अगर दशरथ मांझी पर फिल्म बनाने के अवसर मिले तो?
नहीं फिलहाल इस बारे में नहीं सोचा है. और उन पर शायद कुछ फिल्में बन रही हैं और ऐसी हस्तियों पर फिल्में बननी भी चाहिए. जो फिल्म बना रहे हैं. वह उस फिल्म के साथ पूरी तरह से न्याय करें. यही उम्मीद करूंगा.
आमिर पिछली बार जब आपसे बातचीत हुई थी तो आपने कहा था कि आपको टीआरपी की कोई चिंता नहीं और आपको टीआरपी की बातें समझ भी नहीं आतीं. इस बार आप क्या कहेंगे?
मैं पिछली बार उतनी जानकारी नहीं रखता था. लेकिन हां, अब समझ चुका हूं. लेकिन मैं इस बात से सिरे से इनकार करता हूं कि करोड़ों की आबादी क्या देखती है. इसका निर्णय कुछेक डिब्बे करते होंगे. टीआरपी में तो भारत के कई राज्य आते ही नहीं है. मैं आपको एक किस्सा सुनाता हूं. मैं राजस्थान के बेहद छोटे से गांव में गया था. वहां मैं एयरपोर्ट पर कुछ लोकल मीडिया से मिला. उन्हें पीके फिल्म के बारे में बातचीत करने के लिए बुलाया गया था. लेकिन आश्चर्य की बात है कि किसी ने मुझसे फिल्म के बारे में नहीं सिर्फ सत्यमेव जयते के बारे में बात की तो आप देखिए इस शो की पहुंच कहां तक है. हम फिल्म के माध्यम से जितने लोगों तक नहीं पहुंच पाते. टेलीविजन के जरिये पहुंचते हैं और मुझे अच्छा लगता है कि मैंने ऐसा निर्णय लिया. क्योंकि मुझे लोगों से मिलना अच्छा लगता है.
आपको नहीं लगता कि सत्यमेव जयते ब्रांड इसलिए बन पाया चूंकि आपका नाम शो से जुड़ा है. वरना, ऐसे शो और मुद्दे पहले भी उठाये गये हैं.
हां, यह बात तो सच है कि जब कलाकार इस तरह के स्टेप उठाते हैं तो लोगों पर असर होता है और इसलिए हम कलाकारों को ज्यादा से ज्यादा इस तरह स्टेप्स उठाने चाहिए. ताकि लोगों तक बात पहुंच पाये और लोग इस पर अमल करें. मैं तो कहूंगा कि अगर और भी कलाकार इस तरह के शो करना चाहें तो मैं उन्हें सपोर्ट करूंगा.
सत्यमेव जयते को लेकर आपके परिवार वालों की क्या सोच है?
अम्मी थोड़ा घबराती हैं. चूंकि उन्हें लगता है कि मैं बुरे लोगों का पर्दाफाश कर रहा हूं तो लोग मुझे हानि पहुंचायेंगे. वह मुझे कहती रहती हैं कि आमिर मत करो. मुझे डर लगता है. शेष मेरी पत् नी किरण को यह शो बेहद पसंद है. बेटी आयरा को भी यह शो बेहद पसंद है.
आपके शो में सामाजिक मुद्दे उठाये जाते रहे हैं. तो आखिर आप फिर राजनीति से दूरी क्यों बना कर रखते हैं?
मुझे राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं. मैं तो एंटरटेनर हूं और लोगों को एंटरटेन करना भी एक बड़ी जिम्मेदारी होती है. मैं अगर कलाकार रह कर भी समाज सेवा कर ही सकता हूं और अपने दायित्व को पूरा कर रहा हूं तो यकीनन मैं एक जिम्मेदारी पूरा ही कर रहा हूं न फिर मैं क्यों राजनीति पचड़ों में पड़ूं. मैं वही करूंगा जो मैं कर सकता हूं. मेरा पहला काम एंटरटेन करना है लोगों को और उसके माध्यम से लोगों को एजुकेट करना भी. और मैं इसी में खुश हूं.