20130629

अपनी सी लगती है रान्झाना : धनुष

लोग उन्हें कोलावरी डी वाला कह कर बुलाते हैं. लेकिन दक्षिण में उनकी पहचान सिर्फ कोलावरीडीवाला के रूप में नहीं. वे साउथ के जाने माने स्टार हैं. हां, हिंदी सिनेमा में यह उनकी पहली शुरुआत है. फिल्म रांझणा में वे बनारस की गलियों के छोरे के किरदार में जिस तरह नजर आ रहे हैं, उससे इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि वे आनेवाले समय में बॉलीवुड के खास सितारों में शामिल हो जायेंगे. बात हो रही है धनुष की.

फिल्म रांझणा के निर्देशक आनंद एल राय ने धनुष की लगभग सभी फिल्में देखी हैं और वे इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट थे कि उनकी फिल्म में कुंदन का किरदार धनुष से बेहतर और कोई निभा ही नहीं सकता. बातचीत धनुष से...

 हिंदी फिल्म रांझणा जब आॅफर हुई तो आपका क्या रिएक्शन था 
 सन २००८ से मुझे हिंदी फिल्मों के आॅफर आ रहे थे लेकिन मैं अपनी एक के बाद एक तमिल फिल्मों में मशरुफ था कि मैंने किसी भी हिंदी फिल्म को हां नहीं कहा जब रांझणा आॅफर हुई तो पहले मैंने इसे भी मना कर दिया था लेकिन आनंद सर ने मुझसे कहा कि मुझे सिर्फ तुमसे १५ मिनट मिलना है. उस वक्त मैं कोलकाता में था अपने गाने कोलावरी डी को प्रमोट कर रहा था. वे मुझसे मिलने वहां आए और जब उन्होंने अपनी फिल्म की कहानी मुझे सुनायी मैंने तुरंत उसे हां कह दिया क्योंकि मेरे दिल के किसी कोने से आवाज आयी कि भाषा के अंतर को भूल जाओ अगर तुम यह फिल्म नहीं कर सकते तो तुम एक्टर नहीं हो.

क्या वजह रही जो आप रांझणा को न नहीं कह पाए थे. 
 मैं पूरी तरह से इस किरदार और कहानी से जुड़ गया था. जब आनंद सर मुझे फिल्म की कहानी सुना रहे थे उसके २० सीन में से १४ सीन मेरे साथ निजी जिंदगी में हो चुके थे. मैं कुंदन के किरदार और उसकी दीवानगी से बहुत जुड़ाव महसूस करता हूं इसलिए मैं रांझणा को न नहीं कह पाया.

आप कब और किसके लिए निजी जिंदगी में रांझणा बने थे. 
जब मैं १६ साल का था, वह लड़की दूसरी स्कूल में पढ़ती थी और मैं दूसरी स्कूल. जो जो मैंने सोनम के प्यार को पाने के लिए इस फिल्म में किया है वो सब सब उसके लिए भी किया था. उसने मुझे हां भी कहा था लेकिन दो साल बाद उसने मुझे छोड़ दिया. शुरुआत में मुझे लगा कि यह मेरा हाइस्कूल क्रश है. मैं भूल जाऊंगा लेकिन मैं नहीं भूला. वाकई वह मेरा पहला प्यार था. जो हमेशा रहेगा.

 आपकी जिंदगी में प्यार की क्या परिभाषा है.
सभी के लिए प्यार की परिभाषा अलग अलग होती  है लेकिन मेरे लिए प्यार उसका नाम है जो आपकी प्राथमिकता को बदल दे. मुझे याद है जब मैं प्यार में पड़ा था उससे पहले तक मैं अपनी मां को दिन में चार से पांच बार फोन करता था (हंसते हुए)लेकिन जब प्यार में पड़ा था तो अपना ही ख्याल नहीं रहा था तो मां को क्या फोन करता .

ऐश्वर्या से पहली बार कब और कैसे मिले थे. 
मेरी सेंकेड फिल्म कधाल कोंदेन रिलीज हुई थी. पूरे परिवार के साथ मैं गया था थिएटर में दर्शकों का रिएक्शन देखने के लिए .  वहां पर थिएटर के मालिक ने मुझे ऐश्वर्या से मिलवाया यह कहते हुए कि यह रजनी सर की बेटी हैं. उसके बाद उन्होंने मुझे फूलों का गुलदस्ता भेजा जिसमे लिखा था आपने अच्छा काम किया है किप इन टच (हंसते हुए) मैंने उनकी बात को सीरियस ले लिया फिर हमेशा उनके टच में ही रहने लगा

क्या आपकी पत्नी ऐश्वर्या की तरफ से यह लव एट फर्स्ट साइट वाला मामला है.
मुझे देखकर भी आपको यह लगता है कि कोई मुझसे पहली नजर में प्यार करने लग सकता था शायद मेरा टैलेंट था जो ऐश्वर्या के दिल में जगह मिल गयी.

लाइफ पार्टनर के तौर पर आप दोनों एक दूसरे को कितना कंपलीट करते हैं. 
हम दोनों बहुत युवा थे तब ही शादी कर ली थी इसलिए  हम अब भी एक दूसरे को समझ रहे हैं. मैं अपने काम में ज्यादा मशरुफ रहता हूं इसलिए टाइम नहीं दे पाता हूं. मैं अच्छा हसबैंड नहीं हूं लेकिन बेहतर पिता जरूर बनना चाहता हूं.मेरे दो बेटे हैं.  ६ साल का यात्रा ३ लिंगा, लिंगा का मतलब शिवा होता है. मैं शिवभक्त हूं.


इस फिल्म को लेकर आपके ससुर जी रजनीकांत और आपकी पत्नी ऐश्वर्या की क्या प्रतिक्रिया रही है. 
रजनी सर ने अब तक इस फिल्म का प्रोमो नहीं देखा है और न ही इस फिल्म को लेकर हमारी कोई बात हुई है.हम फिल्मों पर बहुत कम ही बात करते हैं. अपने सारे निर्णय मैं खुद ही लेता हूं.  हां ऐश्वर्या बहुत खुश है. खासकर मुझे हिंदी बोलता देखकर.साउथ में भी सब बहुत खुश है. उत्सव जैसा माहौल है. उम्मीद करता हूं कि फिल्म की रिलीज के बाद भी यह माहौल रहे.

आपकी हिंदी भाषा पर पकड़ कितनी अच्छी हो गयी है. क्या आप हिंदी में अब सहज हो गए हैं. 
 एक और हिंदी फिल्म का मौका दीजिए उसके बाद मैं जब भी आपसे मिलूंगा अंग्रेजी में नहीं हिंदी में ही सारे जवाब दूंगा.
 उत्तर भारतीय कुंदन के किरदार को निभाने के लिए क्या आपको कुछ होमवर्क भी करना पड़ा 
 रांझणा के लिए मैंने कुछ नहीं किया है. सिर्फ मैंने अपनी दाढी मुडवायी है फिर जब फिल्म की कहानी आगे बढ़ी तो बढ़ायी है इससे ज्यादा कुछ नहीं किया क्योंकि मैंने निजी जिंदगी में उन पलों को जिया था.  जब मैंने पहली बार प्यार किया था. मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि उसने मुझे फिर से वो सब जीने का मौका दिया. हां मैं हिमांशु शर्मा का जरूर शुक्रगुजार हूं. मेरी हिंदी को बेहतरीन तरीके से डबिंग करवाने में उन्होंने मेरी बहुत मदद की. वरना आप अगर डबिंग थिएटर में होती तो मेरी हिंदी सुनकर भाग गयी होती थी. 

 हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अब तक कई साउथ के स्टार किस्मत आजमा चुके हैं लेकिन अब तक कोई खास कमाल नहीं कर पाए हैं क्या आपको लगता है कि आप खुद को साबित कर पाएंगे.
मेरे दिमाग में यह सब कुछ भी नहीं है. मैं इस तरह से नहीं सोच रहा हूं. मैं सिर्फ  आनंद सर के बारे में सोच रहा हूं. आदूकलाम मेरी इस फिल्म को यूट्यूब पर देखकर उन्होंने तय कर लिया कि रांझणा का कुंदन मैं ही होऊंगा. मैं उनके उस विश्वास पर खरा उतरना चाहता हूं. जब फिल्म रिलीज हो तो उन्हें अपने फैसले पर पछतावा न हो बस यही चाहता हूं.


सुनने में आ रहा है कि रांझणा की वजह से आपकी तमिल फिल्म मरियान का भविष्य अधर में लटक गया है क्या अब आपकी प्राथमिकता सिर्फ हिंदी फिल्में रह गयी हैं. 
यह खबर गलत है मरियान पूरी हो गयी है,रांझणा २१ को रिलीज हो रही है.  उसका अब तमिल वर्जन भी आ रहा है इसलिए इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि दोनों एक दूसरे के बिजनेस को नुकसान न पहुंचाए. जहां तक प्राथमिकता की बात है हिंदी या तमिल फिल्में नहीं बल्कि मैं अच्छी फिल्मों का हिस्सा बनना चाहता हूं और मुझे लगता है कि अब तमिल और हिंदी सिनेमा जैसे बात नहीं रही है. यहां के लोग वहां काम कर रहे है यहां के वहां. अब सब भारतीय सिनेमा होता जा रहा है.

अगर तमिल की एक अच्छी फिल्म और हिंदी की भी एक अच्छी फिल्म आॅफर हो तो आप किसे चुनेंगे. 
(हंसते हुए) तब मैं उस फिल्म को चुनूंगा जो मुझे सबसे ज्यादा मेहनताना देगी.


क्या वाकई अब हिंदी फिल्मों और तमिल  में कोई अंतर नहीं रह गया है. 
एक दो है जैसे बॉलीवुड फिल्मों का बजट बहुत होता है साउथ फिल्मों का इतना बजट नहीं होता है और एक चीज जो अलग महसूस होती है. वह है सिनेमाटोग्राफर में  वहां पर वी के चंद्रन, रवि बर्मन, संतोष शिवन जैसे सिनेमाटोग्राफर है.

कोएक्टर के तौर पर सोनम कपूर का साथ कितना खास रहा 
सोनम बहुत ही प्यारी एक्ट्रेस है और उनके धैर्य की तारीफ करनी होगी. मेरी खराब हिंदी को उन्होंने बहुत झेला है खासकर कभी भी उन्होंने मेरी हंसी नहीं उड़ायी बल्कि मुझे सपोर्ट ही किया.

आप साउथ के सुपस्टार है लेकिन उत्तर भारत में आपकी पहचान आपके गीत कोलावरी डी ने बनायी है क्या आपको लगता है कि वह पहचान इस फिल्म के लिए भी कारगर साबित होगा. 
कोलावरी डी गाना आया, देश-दुनिया में धूम मचाकर चला गया. उसका मकसद पूरा हो गया. रांझणा को सफलता उस गाने की लोकप्रियता से नहीं बल्कि पूरी टीम की मेहनत से मिलेगी


क्या आप हिंदी फिल्मों के दर्शक हैं और आपकी ख्वाहिश किन निर्देशकों के साथ काम करने की है. 
ज्यादा नहीं थोड़ी बहुत मैंने हिंदी फिल्म देखी है. आखिरी हिंदी फिल्म मैंने बर्फी देखी है. जो मुझे बहुत पसंद आयी थी. मेरी ख्वाहिश आनंद एल राय के साथ ही काम करने की ही है क्योंकि मैं उनके साथ बहुत सहज हूं.

 रनबीर कपूर के साथ आपकी दोस्ती की खबरें आए दिन खबरों में आ रही हैं. 
मैंने भी ऐसी खबरें पढी हैं लेकिन दोस्ती जैसा हमदोनों के बीच कुछ नहीं है. हां हमने एक दो बार फोन पर जरूर बात की है.  इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कह सकता हूं.

 बनारस में शूटिंग का अनुभव कितना खास रहा है. 
 आनंद सर फिल्म की शूटिंग से पहले मुझे बनारस दिखाने ले गए थे काशी विश्वनाथ का मंदिर, घाट सब घूमा. उत्तर भारत हो या दक्षिण जगह के मामले में एक से ही लगते हैं हां संस्कृति जरूर अलग है.  बनारस में कुछ ऐसा है जो मैं नहीं बता सकता हूं ७० दिनों की शूटिंग के दौरान मैंने कोई सपना नहीं देखा. इतना पवित्र जगह थी कि मैं आराम से सो जाता और सुबह उठ भी जाता था. मैं शाकाहारी हूं इसलिए बनारस और मुझे रास आया. वहां की पूडी और आलू की सब्जी जमकर खाता था. चाट समोसा भी बहुत टेस्टी था और सबसे महत्वपूर्ण बात  मैंने बनारस की गलियों में होली खेली थी मुझे नहीं लगता  कि फिर ऐसा कभी कुछ मैं कर सकता हू. ं

बॉलीवुड बहुत ग्लैमरस इंडस्ट्री है और आप बहुत ही सिंपल और जमीन से जुड़े ऐसे में तालमेल बिठाने में क्या कोई परेशानी हुई
 मैं ज्यादा लोगों से नहीं मिला हूं लेकिन मैं जिस किसी से भी मिला वह मुझे सिंपल लगे. मैं अपना काम करने में विश्वास करता हूं और कुछ नहीं देखता न सोचता हूं.

 खबरे आ रही हैं कि आपने आनंद एल राय की अगली फिल्म भी साइन कर ली है. 
हां इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान वह एक फिल्म का आइडिया लेकर आए थे मैंने कहा कि हम करेंगे बाद में फिल्म की शूटिंग के दौरान हम इतने सहज हो गए कि मैंने इस फिल्म को भी हां कह दिया वैसे यह फिल्म तनु वेड्स मनु का सीक्वल नहीं है. इस फिल्म का मैं सह निर्माता भी हूं इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकता 

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