20120113

प्रतिभा की परंपरा बढ़ाता रे परिवार


प्रतिभा की परंपरा बढ़ाता रे परिवार


फिल्मकार श्याम बेनेगल रे सोसाइटी के संयुक्त सहयोग से आगामी 28 जनवरी को ‘डीप फ़ोकस’ नामक किताब कोलकाता में लांच करेंगे. इस किताब में उपलब्ध सामग्री खुद विख्यात फ़िल्मकार सत्यजीत रे एकत्रित की थी. इस किताब में सत्यजीत रे ने उन दुर्लभ आलेखों का संयोजन किया है, जिनमें उन्होंने चार्ली चैपलिन, जीन लुक गोडार्ड, उत्तम कुमार समेत अनेक सृजनशील निर्देशकों की फ़िल्मों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हैं.
इस किताब में सत्यजीत रे ने अपने जीवनकाल में आयोजित विभिन्न फ़िल्म उत्सवों के अनुभवों को भी बांटा है. सत्यजीत के बेटे व निर्देशक-लेखक संदीप रे ने इसका संपादन किया है. ‘डीप फ़ोकस’ संदीप की पहली किताब नहीं है. इससे पहले भी वे पिता सत्यजीत रे की फ़िल्मों व फ़िल्मों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को लगातार किताब के रूप में लोगों के सामने लाते रहे हैं. वे जानते हैं कि सत्यजीत रे सिर्फ़ एक सामान्य फ़िल्मकार नहीं थे, बल्कि वे सृजनशील व्यक्ति भी थे.
फ़िल्ममेकिंग के सांस्कृतिक धरोहर थे. इसलिए, उन्हें सहेजना उनकी अहम जिम्मेदारी है. एक जिम्मेवार बेटे की तरह संदीप लगातार पिता की परंपरा को सहेज रहे हैं. वे खुद भी सृजनशीलता में सक्रिय रहते हैं. वे जानते हैं कि कोई भी परंपरा ताउम्र बरकरार व निरंतर सक्रिय तभी रह सकती है, जब संबंधित लोग उस परंपरा में अपना इनपुट जोड़ें. इस लिहाज से संदीप रे लगातार अपनी फ़िल्मों व कला के कामों से रे परिवार की परंपरा का सफ़ल निर्वाहन कर रहे हैं.
22 साल की उम्र से ही वह अपने पिता सत्यजीत रे के साथ बतौर सहयोगी निर्देशक काम सीख रहे हैं. वह एक अच्छे फ़ोटोग्राफ़र, लेखक, इलुस्ट्रेटर भी हैं. अपने पिता की पसंदीदा फ़ेलुदा किरदार पर उन्होंने पहले टीवी के लिए कार्यक्रम और हाल ही में रॉयल बंगाल रहस्य का निर्माण किया. इसके अलावा वे लगातार कई अन्य गंभीर विषयों की फ़िल्मों का भी निर्देशन व निर्माण कर रहे हैं. अपने पिता की लिखी गयी किताबें व उनके महत्वपूर्ण कामों को वे विभिन्न रूपों से सहेज रहे हैं.
दरअसल, संदीप रे अपने कला व संस्कृति समर्पित परिवार का निर्वाह पूरी जिम्मेदारी से इसलिए कर पाये, क्योंकि यह गुण उन्हें अपने परदादा उपेंद्र किशोर रे, दादा सुकुमार रे व फ़िर पिता सत्यजीत रे से विरासत में मिली. यह पूरा परिवार शुरुआती दौर से बांग्ला सभ्यता को फ़िल्मों व कला के अन्य माध्यमों से बढ़ावा देते रहे हैं. सभी ने व्यक्तिगत कार्यो से इस परंपरा को समृद्ध बनाने में अपनी-अपनी भूमिका अदा की है.
डीप फ़ोकस
संदीप रे ने सत्यजीत रे के अंतिम दौर की फ़िल्में गानाशत्रु, शाखा प्रोक्षा व आगंतुक में बतौर डायरेक्टर ऑफ़ फ़ोटोग्राफ़ी की भूमिका निभायी थी.
-अनुप्रिया अनंत

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