20110207

हां, मैं अपनी मर्जी से शादी करूंगी



अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो में छोटा सा किरदार निभाने के साथ अंकिता शर्मा ने छोटे परदे पर अपनी दस्तक दे दी थी. अब वह सोनी टीवी के नये शो बात हमारी पक्की है में मुख्य किरदार निभा रही हैं. पिछले दिनों इसी शो के मुख्य किरदारों ने शिरडी के साईंबाबा के दर्शन किये. इसी दौरान शिरडी में

अनुप्रिया अनंत ने अंकिता से उनके किरदार व शो के बारे में विस्तार से बातचीत की.

शुरू से एक्टिंग करने का ही शौक था या...

नहीं, मुझे एक्टिंग करने का शौक कभी नहीं रहा. लेकिन यह मेरे लिए भाग्य की बात है कि मुझे लगातार ऑफर मिलते रहे. मैं अभी एक फिल्म भी कर रही हूं. निदर्ेशक की पारखी नजर कि उन्होंने मुझसे भी एक्टिंग करा ली. इसे आप एक्टिंग बाय चांस कह सकते हैं.

बात हमारी पक्की है करने की कोई खाs वजह

मुझे कहानी की स्क्रिप्ट बेहद पसंद आयी. खासतौर से हिमानी शिवपुरीजी जैसी सीनियर आर्टिस्ट के साथ काम करने व सीखने का मौका मिल रहा है. वह मेरी फेवरिट भी हैं. इसलिए मैंने यह शो किया.

अपने किरदार सांची से वास्तविक जिंदगी की अंकिता का जुड़ाव.

मैं वास्तविक जिंदगी में भी सांची की तरह सामान्य सी लड़की हूं. हां लेकिन अपने निर्णय खुद लेती हूं. सीरियल में खासियत यह है कि प्रायः मामीजी जैसे किरदार अपने पति की बहन की बेटी को पसंद नहीं करती. लेकिन इस सीरियल में मामीजी से सांची को बेहद प्यार मिलता है.

अभिनय के अलावा किन चीजों में रुचि है?

मुझे गीत व संगीत में विशारद हासिल है. मैंने हाल में ही बुगी वुगी के प्रोमोशनल इंवेट के लिए परफॉर्म किया. जावेद जाफरी व बुगी वुगी मेरे फेवरिट शो हैं. मैंने एक बार बुगी वुगी में परफॉर्म भी किया है.

सीरियल में काम करने व फिल्म की एक्टिंग में कितना फर्क महसूस करती हैं?

बहुत ज्यादा फर्क है. फिल्म में काम करने का तरीका बिल्कुल अलग है. डेली सोप में काम करना बेहद कठिन है, क्योंकि यहां 9 टू 9 शेडयूल रहता है. इसके अलावा फिल्म की तकनीक व सीरियल की तकनीक में बहुत फर्क होता है. खासतौर से फिल्मों में मेकअप पर खास ध्यान दिया जाता है कि वह ओवर न लगे. सीरियल में यह परेशानी है कि यहां मेकअप पर अधिक जोड़ दिया जाता है. लेकिन अच्छी बात यह है कि टेलीवुड के माध्यम से कई लोगों को रोजगार के माध्यम मिल रहे हैं. खासतौर से हर नये शो में इन दिनों नये चेहरों को तवज्जो दी जा रही है. तो ब्रेक देने की बात की जाये तो टेलीवुड ने एक बड़ा दरवाजा खोला है. साथ ही जो ऑफ स्क्रीन काम करते हैं, उन्हें भी अपने टैलेंट दिखाने का मौका मिल रहा है.

जैसा कि सीरियल का विषय है कि लड़कियों की शादी के लिए मां बाप मैट्रीमोनियल पर आज भी अटूट विश्वास रखते हैं. आपकी अपनी राय क्या है?

हमारे समाज में आज भी लड़की की शादी एक कठिन परीक्षा की तरह है, जिसे हर लड़की के साथ-साथ उसके माता-पिता को भी उतीर्ण होना होता है. ऐसे में मैट्रीमोनियल जैसी चीजें इसलिए लोकप्रिय हुईं, क्योंकि इनकी मदद से माता-पिता की कुछ चिंताएं दूर होने लगी. हालांकि मैट्रीमोनियल द्वारा रचाई गयी कई शादियां सफल रही हैं. इसलिए मुझे लगता है कि अच्छे वर वधू की तलाश के लिए यह अच्छा जरिया है.

जब भी लड़कें लड़कियों को देखने आते हैं. लड़केवालों के कई नखरें होते हैं. इस बारे में आपकी क्या सोच है?

हां, यह सच है कि हमारे समाज में आज भी लड़कियों को शो पीस की तरह किसी लड़के के सामने बिठा दिया जाता है. जबकि अब इस सोच को बदलना चाहिए. लड़के-लड़की दोनों की रजामंदी से ही शादी होनी चाहिए.

तो क्या आप अपनी मर्जी से शादी करेंगी

हां, मैं अपनी मर्जी से शादी करूंगी. इसका यह मतलब नहीं कि मैं लव मैरेज ही करूं. हां, इतना जरूर है कि जिस लड़के से भी शादी करूंगी, वह मेरी पसंद का भी होना चाहिए.

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