20110207

सपनों का धोबी घाट



किरण राव की पहली फिल्म धोबी घाट की कहानी धोबी समुदाय पर आधारित नहीं. लेकिन धोबी घाट से मुंबई की कहानी बयां करने की कोशिश की गयी है. लगातार फिल्म के प्रमोशन और धोबी घाट का नाम दोहराये जाने से जिज्ञासा हुई कि क्या वाकई धोबी घाट की जिंदगी से मिलती-जुलती है मुंबई की कहानी. मन में हजारों सवाल व धोबी घाट को नजदीक से जानने-समझने की ललक के साथ महालक्ष्मी स्थित धोबी घाट से अनुप्रिया अनंत व उर्मिला कोरी लाइव.

धोबी घाट की निदर्ेशिका किरण राव ने बातचीत के दौरान फिल्म के लोकेशन के बारे में विस्तार से बताया था. हमारा काम आसान हो गया था. मोहम्मद अली, धोबी घाट, हाट बाजार, सैंडहास रोड. यही थे मुख्य लोकेशन. हां, यह अलग बात थी कि हमें सारे लोकेशन का वास्तविक पता ज्ञात नहीं था. तय हुआ चर्चगेट पर मिलते हैं. मोहम्मद अली रोड से शुरू करते हैं सफर. दोपहर 12 बजे. वहां कुछ लोगों ने जानकारी दी कि ग्रैंट रोड में मोहम्मद अली. वापस हमने ट्रेन पकड़ी. आ पहुंचे ग्रैंट रोड. पश्चिम में जाना था हमें. टैक्सी से 15 मिनट में पहुंचे मोहम्मद अली रोड. रोड के नजदीक जाते ही लगा धोबी घाट के सारे दृश्य आंखों के सामने है. अरे ये तो वही मसजिद है न. बातचीत के बाद पता चला मिनारा मसजिद है. स्थानीय लोगों से बातचीत का सिलसिला शुरू. यहां फिल्म की शूटिंग हुई है न. आधे दर्जन लोगों ने कहा मालूम नहीं. निगाह गयी पानवाले पर . उसने हां में सिर हिलाया, बोला हां. इस रोड में हुई है. सामने बड़ा सा टावर था. दिखाते हुए कहा कि कई लोग आते थे कैमरा लेकर यहां. आमिर खान खाली पहचान में आ रहे थे. बाकी सब तो नये थे शायद. खैर वहां हमने थोड़ा वक्त बिताया. फिर मरीन ड्राइव को कैमरे में उतारा. फिर अगला पड़ाव सैंडहास रोड . भाईखुला रोड पर स्थित सैंडहास रोड और हाट बाजार की तफ्तीश की. पता चला वहां के ही एक दुकान से आमिर ने खरीदारी की थी. उत्साह परवान पर था. अब हमारी बारी महालक्ष्मी धोबी घाट जाने की जो थी. 3.15 में हम महालक्ष्मी पहुंचे. पश्चिम में निकले. एक फलवाले ने बताया कि यही नीचे तो है धोबी घाट. थोड़ी दूर चलते ही हमारे चेहरे पर मुस्कुराहट थी. अच्छा तो यह है धोबी घाट. फोटोग्राफर के साथ हम आगे बढ़े. धोबी घाट के दरवाजे पर पहुंचते ही एक नौजवान से मुलाकात. पहला सवाल हमारी तरफ से. हिंदी में. धोबी घाट पर फिल्म बनी है. नाम राहुल. जवाब अंगरेजी है. यस आइ नो. आमिर इज हीरो. हमने एक दूसरे की तरफ देखा. वाह अंगरेजी आती है इसे. आपलोग कौन हैं मैडम. हमने बताया. प्रेस से हैं. और बताओ कौन कौन आया था यहां. वन मिनिट मैम इफ यू वांट मच मोर इंफोरमेशन यू शूड पे टू अस वी डोंट अलाउ यू टू क्लीक द फोटोज. रीड द बोर्ड. ये लो. हमारे लिए तो वाकई दिलचस्प बातें हो रही थीं धोबी घाट में. एक तो अंगरेजी में बात. उस पर से पैसे देकर फोटो खींचो. बहरहाल, कुछ देर बाद सबकी सहमति से हम अंदर पहुंचे. धोबी घाट का वास्तविक नजारा. साबुन,ब्लिचिंग पाउडर की गंध, कहीं प्रेस तो कहीं धुलाई का काम जारी,. कहीं पहुंचाने का काम जारी. चलते-चलते केशवजी से मुलाकात. फिर बातचीत. फिर राजेश से मुलाकात. छोटे से सोनू उर्फ मुन्ना से बातचीत सबसे दिलचस्प रही. पूरा नजारा किसी फिल्म की शूटिंग की तरह ही लग रहा था. एक तरह लोग आ रहे थे गंदे कपड़े लेकर, कहीं धुलाई का काम. कहीं उसे प्रेस करने का. पूरे दो घंटे बिताये. 5 बजते ही लोगों में थोड़ी सुस्ताहट नजर आयी. वे शाम को थक चुर कर आराम करने के मूड में थे. हमने सोचा अब अगर हम रुके तो यह तय है कि कोई न कोई हमारा कैमरा या हमें जरूर फटकार लगाया. चूंकि पिछले दो घंटे से हम उनसे सवालों की बरसात कर रहे थे. जिनमें कुछ लोग अच्छे से तो कुछ ने आंखें भी तरेरी थी. सो हम निकल लिये. इससे पहले कि कोई हमें खदेरता. और खदेरता तो हम दौड़ कर भाग भी नहीं पाते. पानी, साबुन से लतपत वहां की फर्श पर इतनी फिसलन थी कि हमारा न फिसलना मुमकिन ही नहीं था. जो देखा, महसूस किया. पूरा नजारे की सीधा प्रसारण का अनुभव कुछ ऐसा ही था.

यह हैं धोबी घाट के असली मुन्ना

नाम ः सोनू

उम्र ः 11 साल

इलाका ः महालक्ष्मी से दादर तक के कपड़े.

सपना ः डॉक्टर

धोबी घाट फिल्म के बारे में सुना है. कौन है हीरो ः नहीं

फिल्म धोबी घाट में प्रतीक बब्बर मुन्ना के किरदार में नजर आ रहे हैं. फिल्म धोबी घाट का मुन्ना सलमान खान की तरह एक्टर बनना चाहता है. लेकिन धोबी घाट का असली मुन्ना उर्फ सोनू डॉक्टर बनना चाहता है. सोनू ने बताया कि वह सुबह 4 बजे उठ जाता है. फिर थोड़ी पढ़ाई करने के बाद महालक्ष्मी से दादर तक के कपड़े इकट्टे करता है और फिर उसे लाकर धोबी घाट में दे देता है. फिर स्कूल जाता है. स्कूल से आने के बाद का समय धोबी घाट के नाम ही हो जाता है. कपड़े धोने के बाद शाम में 7 बजे के बाद जब थोड़ा वक्त मिलता है तो वह पढ़ाई में समय दे देता है. लेकिन उसकी बहुत ख्वाहिश है कि वह डॉक्टर बने. उसे पता नहंी है कि डॉक्टर बनने के लिए उसे तैयारी कैसे करनी है. लेकिन डॉक्टर तो उसे बनना है. बकौल सोनू हमको बस इतना पता है कि डॉक्टर लोग सफेद रंग का शर्ट पहनते हैं और कान में फोन लगाते हैं. बस. तो जब भी हमको शर्ट दिखता है न सफेदवाला तो हम उसको पहन कर एक बार अपने को मिरर में निहार लेता है.

नाम ः राजेश

उमः 35 साल, पिछले 15 साल से कार्यरत

इलाका ः महालक्ष्मी से लेकर सांताक्रूज

सपना ः अपना व्यवसाय शुरू करना

धोबी घाट के बारे में सुना है , कौन है उसमें हीरो ः हां, सुना भी है और देख भी लिया. आमिर खान हम सबको दिखाये थे न. अभी कुछ दिन पहले.

बतौर राजेश सपने से क्या होता है मैडम. हम लोग का तो पूरा दिन बस इ कपड़ा सब रगड़ते-रगड़ते चला जाता है. साबुन, फिनाइल, ब्लीचिंग पाउडर, पानी बस इसी में जिंदगी बीतती है. सबकी गंदगी साफ करो. सबको चमकाओ और खुद गंदगी में रहो. खाना खाने जाओ तो लगता है कि हाथ से स्मेल आ रहा है. मेरा बहुत मन था कि अपना कुछ काम शुरू करेंगे. लेकिन पैसा तो है नहीं उतना. तो बस चलता रहता है गुजारा.

नाम ः केशव करवेरकर

उम्र ः 51 साल

इलाका ः महालक्ष्मी से चर्चगेट तक

धोबी घाट के बारे में सुना है. कौन हैं उसमें हीरो ः हां सुना है, आमिर खान है.

पुस्तैनी काम है ये.

बतौर केशव यह हमारा पुस्तैनी काम है. हम जात से भी धोबी हैं और यहां काम भी करते हैं. अब तो यही रोजी रोटी है. मेरा काम खासतौर से सबको कपड़ा पहुंचाना है. पहले धोते भी थे. लेकिन अब उम्र हो जाने के बाद थोड़ा कम कर दिया है. धोना धाना. हो नहीं पाता, तो बेटा मदद करता है धोने में. टाइम मिलता है तो कभी कभी धो लेते हैं. अगर सफाई नहीं होता है कपड़े में तो बेकार का बात सुनाता है लोग. इसलिए बड़ी मेहनत लग जाती है. हम लोग को. पहले जब हम जवान थे न मैडम तब चर्चगेट तक साइकिल से चले जाते थे. अब थोड़ा नजदीक तक जाते हैं. हम तो कई बिजनेस मैन के घर में भी जाते थे. बड़ा-बड़ा घर में भी. हॉस्पिटल में भी जाते हैं.

दिनचर्या

सूर्योदय से पहले शुरू हो जाती है जिंदगी

मुंबई के धोबी घाट में काम करनेवालों की जिंदगी सुबह 4 बजे से शुरू हो जाती है.

सुबह 4 बजे ः उठना,

5 बजे तक ः फ्रेश होकर काम पर जाने की तैयारी

6 बजे ः तय होता है कौन जायेगा किस इलाके में.

7 बजे ः प्रायः साइकिल से निकलती है टोली

12 बजे तक प्रायः कपड़े पहुंचाने और लाने का काम

दोपहर 12 बजे से शाम के पांच बजे तक कपड़े धोने, खाना खाने, सुखाने व प्रेस का काम.

रात में 8 बजे तक कपड़े पहुंचाने का काम

रात 10 बजे सो जाना.

पुरुषों का अधिकतर वक्त वही गुजरता है.

महिलाएं भी बटाती हैं हाथ. प्रायः चावल, दाल और मछली पकता है.

किरण राव

मुंबई और धोबी घाट की एक ही कहानी

किरन राव, निदर्ेशिका, धोबी घाट ः गेट वे ऑफ इंडिया, जूहू चौपाटी या मरीन ड्राइव जिस तरह मुंबई की पहचान हैं. उसी तरह कभी धोबी घाट भी मुंबई के खास धरोहर हुआ करते थे. पूरे भारत में मुंबई के धोबी घाट की अलग अहमियत थी. चूंकि मुंबई शहर और धोबी घाट की कहानी एक दूसरे से बेहद मिलती जुलती है. जिस तरह लोग हजारों ख्वाहिशें लेकर आकर आते हैं. आधे-अधूरे से सपने यहां आकर पूरे होते हैं. उसी तरह जिस तरह धोबी घाट में गंदे कपड़े फिर से चमक कर नये बन जाते हैं. मैं मानती हूंं कि मुंबई भी सपनों की धोबी घाट है.

हिंदी सिनेमा जगत में हर किसी ने अपने कैमरे से मुंबई शहर पर हमेशा जूम इन जूम आउट किया है. किरण राव ने भी धोबी घाट में मुंबई के कुछ इन वास्तविक लोकेशन को फिल्माया है. एक नजर

मोहम्मद अली रोड ः ग्रैंट रोड स्थित मोहम्मद अली रोड में रहती है यास्मिन. यहां स्थित मिनारा मसजिद पर हुआ है कई बार कैमरा जूम इन. यही स्थित एक निर्माणाधीन टॉवर में भी घूमने जाते हैं फिल्म के किरदार अरुण, यासमिन.

ग्रैंट रोड फ्लाइओवर ः फिल्म के कई दृश्य में दिखाये गये हैं ग्रैंट रोड.

महालक्ष्मी लोकल स्टेशन ः मुन्ना, अरुण, यासमिन और साइ कई बार नजर आयी हैं लोकल ट्रेन में.

बोरिवली सबवे स्टेशन ः मुन्ना तुझे प्यार हो गया है. फिल्म में मुन्ना व उनके दोस्त के साथ फिल्माये गये दृश्य बोरिवली के सबवे के हैं.

धोबी घाट ः मुन्ना धोबी घाट का रहनेवाला है. साइ फोटोग्राफी करने आती है.

सैंडहस रोड व हाट बाजार ः भाईखल्ला रोड स्थित सैंडहास रोड व हाट बाजार में दिखे हैं अरुण उर्फ आमिर फिल्म में अपने पेंटिंग के लिए यही से जुटाते थे सामग्री

1 comment:

  1. अरे किरण ने ही नहीं आपने भी एक धोबी घाट धुन्धी है.....मुंबई भी सपनों की धोबी घाट है....हाँ है..सपनो का धोबी घाट जहान मुन्ना सपने बुनते हुवे आते हैं और जिन्दगी भर अपने सपनो की चौखट पर सर पटक पटक कर ढ़ोते रहते हैं..

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